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Saturday, November 07, 2009 00:22 [IST]  

danik bhaskarसैनिक स्कूल तरस रहा सुविधाओं को

विक्रम ढटवालिया

schoolहमीरपुर. ऑर्मी ऑफिसर्स की पौध तैयार करने वाला सैनिक स्कूल आधारभूत ढांचे से जूझ रहा है। हॉस्टल सुविधा की बात हो या मुख्य भवन की रेनोवेशन की। प्रदेश के इस एकमात्र स्कूल का हर भवन रिपेयर मांग रहा है। भीतर की सुविधाएं भी 30 साल पुरानी हैं।



बजट की कमी स्कूल के इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने में बौनी साबित हो रही है। स्कूल का व्यवस्थागत निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार का सारा दायित्व राज्य सरकार के हवाले है। लेकिन पिछले कुछ सालों से पैसे की कमी यहां इसमें सुधार के रास्ते में बाधा बनी हुई है। स्कूल प्रशासन को जितना बजट चाहिए उतना मिल नहीं रहा। इक्का-दुक्का पैसा मिलता भी है, लेकिन उससे एकमुश्त सुधार नहीं हो पा रहा।



स्कूल में 530 बच्चे हैं। पिछले साल एनडीए में 14 बच्चे सिलेक्ट हुए थे। रक्षा राच्य मंत्री एमएम पलम राजू के दौरे ने भी स्कूल की दशा सुधारने के लिए राच्य सरकार से पैसा उपलब्ध करवाने की ओर सीधा इशारा किया था। उन्होंने यह भी कहा था कि राज्य सरकारें कई राज्यों में इन स्कूलों के लिए धन उपलब्ध करवाने में कदम नहीं उठा रही, जिससे इनके आधारभूत ढांचा अपलिफ्ट नहीं हो पा रहा है।



चाहिए थे 3.50 करोड़, मिले 50 लाख रुपए



दरअसल देश में सैनिक स्कूलों को हरेक राज्य में खोलने के पीछे यही सोच थी कि संबंधित क्षेत्रों से ऑर्मी ऑफिसर्स की नर्सरी तैयार की जाए। इसके लिए जमीन, इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरी सुविधाओं का सारा खर्चा वहां की राज्य सरकारें उठाएंगी। हिमाचल में भी ऐसा ही हुआ। राज्य सरकार सालाना लाखों की ग्रांट इस संस्थान को दे रही है। लेकिन पिछले कुछ सालों से इसमें अचानक कमी आई है।



ग्रांट इन ऐड अब करीब 2 लाख रु.सालाना हो गई है। जबकि स्कॉलरशिप की राशि 50 लाख रुपए से ऊपर दी जा रही है। ग्रांट इन ऐड घटने से इंफ्रास्ट्रक्चर ढांचे में सुधार नहीं हो पा रहा है। 2008-09 में आधारभूत ढांचे में सुधार के लिए पीडब्ल्यूडी ने 3.50 करोड़ रुपए का एक प्रोजेक्ट तैयार कर सरकार को भिजवाया था। लेकिन केवल 50 लाख ही मिला और इससे मुख्य भवन की छत की ही मरम्मत हो पाई। ओल्ड स्टूडेंट्स यूनियन में अध्यक्ष संदीप डडवाल का भी कहना है कि यहां आधारभूत ढांचा अब मॉर्डन हो जाना चाहिए।



पिछले कुछ सालों ग्रांट से इन ऐड कम हो गई है। रिपेयर वर्क भी नहीं हो पा रहा है। हॉस्टल्स को मॉर्डन सुविधाओं में तब्दील करने के लिए अलग से बजट चाहिए है। इसके बाथरूम और दूसरी सुविधाएं उसी समय की हैं जब 1979 में इनका निर्माण पूरा हुआ था।



कर्नल एसएस मिन्हास प्रिंसिपल सैनिक स्कूल सुजानपुर टीहरा हमीरपुर (हि.प्र.)

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