जीआईसी की मदद से तय होंगे नए रूट
शिमला. प्रदेश में भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईसी) की मदद से लोक निर्माण की नई सड़कें और परिवहन विभाग के नए रूट तय होंगे। यह तकनीक यातायात प्रबंधन में भी सहायक होगी। जीआईसी तकनीक का इस्तेमाल वनों में लगने वाली आग की सूचना और शहरी विकास प्रबंध पर भी किया जा सकेगा।
एसएमएस गेटवे सर्विस, ई—गर्वनेंस और ई—समाधान के बाद हिमाचल के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने जीआईसी और एमआईएस जैसी तकनीक को इंजीनियरिंग उद्देश्यों के लिए एक दूसरे से जोड़ने की योजना बनाई है। विभाग जीआईसी को सुदृढ़ करने के लिए एकल नेटवर्क विकसित कर रहा है ताकि सरकार और सार्वजनिक उपभोक्ताओं के बीच सूचनाओं के आदान—प्रदान को समन्वित तरीके से सुनिश्चित बनाकर जन सेवाओं में सुधार किया जा सके।
मुख्य सचिव आशा स्वरूप ने सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा भौगोलिक सूचना प्रणाली पर आयोजित कार्यशाला के उदघाटन अवसर पर दी। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य में नागरिकों को सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध करवाने में सरकार सबसे बड़ी सेवा प्रदाता है।
इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए मेप आधारित ई—गवर्नेस सेवा कारगर हो सकती है। विकास के विभिन्न क्षेत्रों में आंकड़ों के लिए यह सूचना प्रणाली महत्वपूर्ण है। डिजिटल मेपिंग और जीआईसी जैसी आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से ही भविष्य में देश के विकास को सुनिश्चित बनाया जा सकता है।
इससे पूर्व जीआईसी इंस्टीट्यूट के डीन एमके मुंशी ने जियोस्पेशल टेक्नोलॉजी ओवरव्यू पर प्रस्तुति दी और इसके उपयोग के बारे में बताया। राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर हैदराबाद के डॉ. पीएस रॉय, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंटर देहरादून के प्रो. बीएस सोखी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के सदस्य सचिव नगीन नंदा और एमटीएस के डॉ. थापा ने भी अपनी प्रस्तुति दी।
इस अवसर पर सूचना प्रौद्योगिकी के प्रधान सचिव बीके अग्रवाल, निदेशक सुभाशीष पांडा, अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय शुक्ला सहित कई अधिकारी मौजूद थे।










