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Saturday, November 07, 2009 01:58 [IST]  

danik bhaskarबाकी जो बचा महंगाई मार गई

Bhaskar News

kurukshetraकुरुक्षेत्र. महंगाई ने न केवल गृहिणी की रसोई बिगाड़ दी है बल्कि उसे अपने बजट में कटौती करने के लिए विवश कर दिया है। बच्चों की ख्वाहिशों की जगह अब आम घरों में जरूरी खाद्यान्न पदार्र्थो ने ले ली है।



सब्जियों, फलों, के साथ साथ खाद्यान्न पदार्थ ही महंगे नहीं हुए हैं बल्कि बच्चों के आने जाने के वाहन के साथ साथ उनकी कापी किताबें भी महंगी हो गई हैं। पेट्रोल डीजल व कड़वी होती चीनी का असर सबसे अधिक मध्यवर्गीय वर्ग पर पड़ा है।



हायर लेवल के लोगों पर इस महंगाई का इसलिए अधिक असर नहीं पड़ा, क्योंकि वे मानसिक रूप से पहले ही इसके लिए तैयार थे। हां सोने चांदी के रेट में पहले से अधिक हैं। पिछले साल के मुकाबले इस साल खाद्यान्न सहित रोजमर्रा की सभी वस्तुओं में 20 से 50 प्रतिशत तक की तेजी आ चुकी है और आगे इनमें किसी भी प्रकार से मंदी की गुंजाइश नहीं है।



हालांकि बाजार के जानकारों का मानना है कि सरकारी और निजी क्षेत्र की नौकरियों में लोगों के वेतन में बढ़ोत्तरी हुई है, जिससे उपभोक्ता की क्रय शक्ति में बढ़ोत्तरी हुई है। एक अनुमान के मुताबिक पिछले साल की तुलना में स्तुएं पाउडर, हेयर ऑइल, क्रीम, बिस्किट, ब्रेड, खाद्यान्न, गैस सिलेंडर हो या सुबह का नाश्ता, ऑफिस जाने-आने, शाम को परिवार के साथ घूमने या किसी होटल में खाना खाना, सब पर महंगाई काबिज हो चुकी है।



स्कूल कालेज में बच्चों की फीस बढ़ गई है, पेट्रोल डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी के नाम पर स्कूल बसों ने किराया बढ़ा दिया, कॉपी किताबें, कपड़े इत्यादि की कीमतें भी ऊपर हैं। बाजार से जो थैला सौ रुपए की हरी सब्जी से भरता था वह आज 250 से 300 खर्च करने के बाद भी खाली रहता है।



कुल मिलाकर आपका सोना, जगना, उठना, नहाना, धोना, खाना, पीना, आफिस जाना, घूमना, बच्चों को पालना, पढ़ाना आदि सब महंगा हो चुका है। महंगाई से निपटने कुछ एफएमसीजी कंपनियों ने कीमतों को न बढ़ाकर अपने प्रोडक्ट के वजन को कम कर दिया है।



जितना खाना, उतना बनाना



अब तो जितना खाना है उतना ही बनाया जाता है। टूथ पेस्ट से मच्छर मारने की टिकिया तक सभी महंगा हो गया है। दो बच्चों के परिवार का पांच हजार रुपए में मासिक किराना आता था, वही अब सात से आठ हजार तक पहुंच गया है। - सीमा राणा, गृहिणी



हर चीज महंगी



सब्जियों और फलों के दाम यकायक बढ़े हैं, आम आदमी जाए तो कहां जाए। बीस रुपए किलो मैथी और चालीस रुपए किलो सेब लेकर जा रहा हूं, हर चीज महंगी है, सरकार ने इतनी महंगाई कर दी है कि आदमी रोटी भी नहीं खा सकता। - मदलाल, बुजुर्ग



नहीं चल रहा काम



महंगाई बढ़ने से रसोईघर ही नहीं पेट्रोल का बजट भी गड़बड़ा गया है। छटवां वेतनमान लागू होने से तनख्वाह में डेढ़ हजार रुपए की बढ़ोतरी हुई, लेकिन काम नहीं चल रहा है। दाम इतने बढ़ गए हैं कि बचत कर पाना मुश्किल हो गया है। - देवेंद्र राणा, समाजसेवी



चीनी ने बढ़ाई परेशानी



चीनी का रेट 38 से 40 रुपए है। दालें भी कैसे कोई खरीदे, किसी से कुछ नहीं कहा जा सकता। चीनी महंगी होने से जहां ग्रहणियों को बजट संभालना मुश्किल हो गया है वहीं आम आदमी को भी कई परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। - फतेह चंद गांधी, अध्यक्ष, व्यापार मंडल



खर्चो में की कटौती



महंगाई इतनी बढ़ गई है कि खर्चो में कटौती करनी पड़ रही है। पहले तो हम 15 दिन में एक बार होटल में खाना खाते थे, लेकिन अब 2-3 महीने में एक बार होटल जाते हैं। दालों की जगह राजमा, लोभिया या सब्जी का उपयोग ज्यादा कर रहे हैं। - रानी, गृहिणी, चक्रवर्ती मोहल्ला



अब सोचना पड़ता है



अब हम खर्चे में कटौती करने लगे हैं। पहले पूरे परिवार के साथ सप्ताह में एक बार बाहर जाने का प्रोग्राम बन जाता था, लेकिन अब सोचते हैं कि गाड़ी तो अपनी है, लेकिन पेट्रोल तो नहीं, इसलिए अब 15 दिन में एक बार जाते है। - सतबीर सिंह नरकातारी

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