जेल में सीखा नकली नोट छापना
जगराओं. जेल में कैदियों को कंप्यूटर ट्रेनिंग इसलिए दी जाती है, ताकि वे रिहा होकर रोजगार हासिल कर सकें। परंतु दो शातिर अपराधियों ने इस ट्रेनिंग में अपराध के नए गुर सीख लिए। एक नकली नोट छापने वाले गिरोह के सदस्य ने इन्हें जेल में अपनी कला सिखा दी और बाहर आते ही दोनों ने कारोबार भी शुरू कर दिया। सीआईए स्टाफ द्वारा 64 हजार रुपए के नकली नोटों के साथ पकड़े गए दो आरोपियों ने पूछताछ में यह खुलासा किया है।
हरजीत सिंह पुत्र गुरनाम सिंह निवासी पंडोरी, तरनतारन और भगवान दास पुत्र बली राम निवासी बाल सिंह नगर, लुधियाना को पुलिस ने वीरवार को हिरासत में लिया था। दोनों से हुए खुलासे ने पुलिस को तो चौंकाया ही है, साथ ही जेलों में कैदियों को सुधारने के लिए शुरू किए जा रहे नए कार्यक्रमों और तकनीकों की जानकारी देने की योजनाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
पकड़े गए हरजीत सिंह ने बताया कि वह अमृतसर की जेल में बंद था, तब उसकी मुलाकात बिल्लू नामक व्यक्ति से हुई थी। वह जाली नोट बनाने और बेचने के आरोप में जेल में बंद था। इसी दौरान सरकार की ओर से कैदियों को कंप्यूटर ट्रेनिंग दी जाने लगी। बिल्लू ने उसे कंप्यूटर पर नोट बनाने की कला सिखा दी। कत्ल के मामले में बंद हरजीत सिंह को हाईकोर्ट ने वर्ष 2007 में बरी कर दिया।
बिल्लू ने उसे लुधियाना जेल से जमानत पर बाहर आए भगवान दास से मिलने को कहा। दोनों में मुलाकात हुई और उन्होंने जाली करंसी का काम शुरू कर दिया। कहानी फिल्मी जरूर है, पर पुलिस के मुताबिक दोनों ने पूछताछ के दौरान यही बात बताई है। मामले की जांच कर रहे एसआई जगजीत सिंह ने बताया कि दोनों की निशानदेही पर शुक्रवार को भी 90000 के जाली नोट बरामद बरामद किए गए हैं, जो केवल एक ही तरफ छपे हुए हैं।
दोनों लोगों से बरामद हुआ कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर व अन्य सामान बरामद करके अदालत में पेश कर दिया गया है। दोनों आरोपियों का चार दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया गया है। इन्हें इंटेरोगेशन सेंटर अमृतसर भेजा जाएगा।










