Danik Bhaskar Logo
| 42 Editions | 10 States

Saturday, November 07, 2009 02:31 [IST]  

danik bhaskarजर्मनी की टीचर को पसंद आए स्टूडेट्स

प्रदीप राय

अम्बाला. शहर में जर्मनी की टीचर पढ़ाने आई है। बच्चे अपनी विदेशी टीचर की क्लास लगाकर काफी खुशी महसूस करते हैं। उधर टीचर कहती हैं कि यहां के बच्चे बड़े अनुशासित है, ऐसे हमारे देश में नहीं।



भारत के साथ सांस्कृतिक, शैक्षणिक संबंध मजबूत करने के इच्छुक जर्मनी ने एक खास कार्यक्रम के तहत टीचर मैनुएला मैजोरक को यहां भेजा है। वे इन दिनों छावनी के एसडी पब्लिक स्कूल में इंग्लिश और केमिस्ट्री पढ़ा रही हैं।



यहां पढ़ाकर उन्हे कैसा लगा?



भारत की शिक्षा पद्धति में उन्हे क्या खासियत और कमी लगी और भारत की सांस्कृतिक,सभ्यता को लेकर भास्कर ने मैनुएला से बातचीत की।



भारत में आकर पढ़ाने का निर्णय कैसे लिया?



जर्मनी भारत के ज्ञान और सांस्कृतिक का बड़ा आदर करता रहा है। इन संबंधों को मजबूत करने के लिए हमारा देश भारत में प्रतिनिधि भेजता है। मैं जर्मनी के एक बड़े स्कूल में पढ़ाती थी। अचानक भारत जाकर पढ़ाने का आफर मिला। भारत से व्यक्तिगत तौर पर प्रभावित थी। एक पल में सहमति जता दी।



यहां पढ़ाकर कैसा लग रहा है?



बहुत अच्छा। अनुभव इतना अच्छा रहेगा। इसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी। थर्ड से लेकर मैट्रिक तक के बच्चों को पढा़ती हूं। पढ़ाने में इतना मजा आ रहा है कि समय का पता ही नहीं चलता।



विदेशी टीचर से बच्चों का पढ़ना या यूं कहें कि विदेशी बच्चों को पढ़ाना? शुरू में दिक्कत नहीं आई बिल्कुल नहीं। मैं इंग्लिश पढ़ाती हूं और भारत में इंग्लिश पढ़ने पढ़ाने का अच्छा माहौल है। मैंन यहां इंग्लिश को कुछ इंटरनेशनल स्टैंडर्ड से पढ़ाया, तो बच्चे तुरंत बात पकड़ते चले गए।



जर्मनी और भारत के स्टूडेंटस में क्या अंतर लगा?



स्कूल में बच्चे यहां बहुत अनुशासन में रहते हैं और स्कूलों का अनुशासन भी अच्छा है। जर्मनी में बच्चों में ऐसा अनुशासन नहीं। वे क्लास में मोबाइल लेकर आते हैं। अपनी एक्टीविटी में भी सख्ती की परवाह नहीं करते। यहां बच्चे बात को तुरंत ज्यों का त्यों मानते है। मैं तो जर्मनी जाकर सबसे पहले यह बात सबसे पहले सबको बताउंगी।



भारतीय शिक्षा पद्धति आपको कैसी लगी?



देखिए मुझे यहां आए कुछ हफ्ते हुए हैं? इसलिए ज्यादा विश्लेषण तो नहीं कर सकती। हां ये कह सकती हूं कि यहां पढ़ाई को काफी गंभीरता से लिया जाता है। उच्च शिक्षा में भारत का डंका विश्व मानता है। लेकिन जो खामी नजर आती है, वह पढ़ाई में बढ़ता हुआ तनाव। बहुत बुरा लगता है जब यहां बच्चों में पढ़ाई के कारण सुसाइड जैसी घटनाएं सुनने को मिलती है। बच्चों पर ऐसा दबाव नहीं होना चाहिए।



जर्मनी में पढ़ाई की क्या खासियत है



हमारे देश में बच्चे को स्कूल भेजने की जल्दबाजी नहीं होती। करीब सात साल का बच्च पहली कक्षा की पढ़ाई शुरू करता है। इससे पहले चार से साढ़े छह साल की उम्र तक किंडर गार्डन जाता है।
वहां उसके लिए पढ़ाई में भरपूर खेल के अलावा कुछ नहीं होता।



इसी में वह सीखता है। हम पहले बच्चे के विकास पर पूरा ध्यान देते हैं। उसके बाद ही पढ़ाई का काम उसके बाद शुरू होता है। दूसरे बच्चा पढ़ाई अपनी मातृभाषा में करता है। तीन चार साल बाद इंग्लिश शुरू होती है। किताबें गिनी चुनी पढ़ते हैं।

  share
apne vichaar
post a comment
name:
email:
website:
code:
 
select your language:
Hindi Roman Hindi Phonetic English
comment: