अमेरिका में अश्वेत महिलाओं के साथ भेदभाव
वाशिंगटन. अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति के तौर पर बराक ओबामा के चयन के बाद भी नस्ली भेदभाव की जड़ें वहां गहरे जमी हैं। खासकर अफ्रीकी मूल की महिलाओं के साथ यह इस कदर गंभीर है कि उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है।
फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक अफ्रीकन-अमेरिकी महिलाओं के साथ का भेदभाव उनको अपनी ही नजरों में गिरा देता है। वे मानसिक तौर पर कमजोर और अवसादग्रस्त हो जाती हैं।
शोधकर्ताओं ने बताया कि उनके नतीजे बताते हैं कि अनुचित व्यवहार की सोच गंभीर अवसाद की तरह हो जाती है, जो अंतत: अफ्रीकी महिलाओं को बीमार बना देता है। अध्ययन के दौरान डॉक्टर वेर्ना कीथ की अगुआई वाली टीम ने ‘नेशनल सर्वे ऑफ ्मेरिकन लाइफ: कोपिंग विद स्ट्रेस इन ट्वेंटीफस्र्ट सेंचुरी’ के आंकड़ों का इस्तेमाल किया। इस शोध में 2300 वयस्क अफ्रीकी-अमेरिकी महिलाओं के विचार जाने गए।
जिन महिलाओं के साथ भेदभाव किया गया, उनको अधिक अवसादग्रस्त पाया गया। इसकी एक वजह यह थी कि धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बिल्कुल खत्म हो गया। वे चुनौतियों का सामना नहीं कर पातीं और खुद को शक्तिहीन पाती हैं।
शोध के मुताबिक हैरत की बात तो यह है कि प्रौढ़ा और बूढ़ी अश्वेत महिलाओं ने भेदभाव की कम घटनाओं को बताया, गुलामी कम महसूस की और ुवाओं की तुलना में कम अवसादग्रस्त पाईं गई। इसके अलावा, अधिक शिक्षित महिलाएं भी जीवन को अपनी मर्जी से चलाने में खुद को सक्षम पाती हैं।










