हिरासत में मौत पर एसआई दोषी करार
चंडीगढ़. मनीमाजरा थाने में अनिल कुमार की हिरासत में मौत के केस में जिला अदालत ने सब इंस्पेक्टर नरेंद्र सिंह को कत्ल का दोषी करार दिया है। नरेंद्र पर आरोप था कि जुलाई 2007 में उन्होंने मनीमाजरा थाने में अनिल की पिटाई की जिससे उनकी मौत हो गई। एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एवं सेशन जज राज राहुल गर्ग की अदालत ने नरेंद्र को अनिल की मौत का दोषी माना है। सोमवार को सजा सुनाई जा सकती है।
एसआई नरेंद्र सिंह घटना के बाद से अब तक पुलिस कस्टडी में थे। उनकी जमानत याचिका पहले हाईकोर्ट, फिर सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो चुकी है। सरकारी वकील मनु कुक्कड़ ने बताया कि मेडिकल साक्ष्यों और अन्य सबूतों के आधार पर नरेंद्र को अनिल की मौत का कारण माना गया। डॉक्टरी जांच में अनिल की मौत की वजह गिरने से व पिटाई बताई गई थी। बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि घटना के दिन एसआई नरेंद्र सिंह दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक थाने में नहीं थे। इस बात की पुष्टि सीसीटीवी फुटेज में भी हो चुकी है। मजिस्ट्रेट जांच में भी इसका खुलासा हुआ था। एसआई पर 15 दिसंबर 2008 को आरोप तय किए गए थे।
मनीमाजरा थाने में पिटाई से गई थी अनिल की जान
मॉडर्न हाउसिंग कॉम्प्लेक्स निवासी कांस्टेबल हरजीत कौर ने पुलिस में शिकायत की थी कि उनके घर के नजदीक एक युवक संदिग्ध हालत में घूम रहा है। शिकायत के बाद कॉलोनी नं. 4 के अनिल कुमार को एसआई नरेंद्र और कांस्टेबल रूपिंदर सिंह पूछताछ के लिए थाने ले गए। परिजनों का आरोप था कि पूछताछ के दौरान एसआई नरेंद्र ने अनिल को बुरी तरह पीटा।
अनिल को गंभीर हालत में पीजीआई ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। अनिल की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद उनके परिजनों ने पीजीआई से तब तक शव लेने से इनकार कर दिया, जब तक मौत के जिम्मेदार पुलिस अधिकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं होती। इसके बाद तत्कालीन एसडीएम शूरवीर ने अनिल की बहन गीता को लिखित में निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिलाया था।
पुलिस ने कहा था कि अनिल की मौत थाने की खिड़की से छलांग लगाने की वजह से हुई। अनिल कूदते वक्त नीचे गिर गया था। पुलिस ने अनिल का क्रिमिनल बैकग्राउंड बताते हुए वांछित अपराधी बताया था। अनिल के परिजनों के मुताबिक वह 12वीं पास था और आईटीआई से डिप्लोमा किया हुआ था।










