‘सार्वजनिक उपक्रमों में हिस्सेदारी बेचना राष्ट्रविरोधी’
नई दिल्ली. वाम दलों ने मुनाफे वाले सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) में 10 फीसदी तक हिस्सेदारी बेचने के सरकारी फैसले को राष्ट्र विरोधी कदम बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है।
चारों वाम दलों ने यहां शुक्रवार को जारी संयुक्त बयान में कहा है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने इन उपक्रमों में सरकारी हिस्सेदारी घटाकर 51 फीसदी तक लाने की घोषणा कर इनके निजीकरण का रोडमैप तैयार कर दिया है, क्योंकि इसके बाद सरकारी हिस्सेदारी को अल्पांश हिस्सेदारी (50 फीसदी से कम) में बदलने के लिए अब केवल एक छोटा कदम उठाने की जरूरत होगी।
वाम दलों ने कहा कि सरकार इन उपक्रमों में सार्वजनिक भागीदारी सुनिश्चित करने का बहाना लेकर यह कदम उठा रही है। उन्होंने कहा है कि सरकार ने विनिवेश से जुटने वाली राशि का इस्तेमाल नहीं करने और इसके ब्याज की राशि का उपयोग करने की बात कही थी लेकिन अब इसे तीन साल के लिए टाल दिया गया है इस राशि का इस्तेमाल राजकोषीय घाटे को पूरा करने में किया जा सके। चारों दलों ने कहा कि यह दलील आंखों में धूल झोंकने वाली है कि विनिवेश से प्राप्त होने वाली राशि का इस्तेमाल सामाजिक क्षेत्र के कार्यक्रमों में किया जाएगा।
उन्होंने सरकार पर नवरत्न कंपनियों में विनिवेश न करने की अपनी पूर्व की प्रतिबद्धता से हटने का भी आरोप लगाया। माकपा, भाकपा, आरएसपी और फारवर्ड ब्लॉक चारों दलों ने कहा है कि वे निजीकरण के इस कदम का कड़ा प्रतिरोध करने के लिए रणनीति बनाएंगे। माकपा के महासचिव प्रकाश करात ने कहा कि उनकी पार्टी संसद और संसद के बाहर यह मुद्दा उठाएगी।










