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Saturday, November 07, 2009 02:53 [IST]  

danik bhaskarनेचर ट्रेल दूर करेगा टेक्नोलॉजी की टेंशन

मनोज अपरेजा

greenyचंडीगढ़. वायरस, सर्वर डाउन, सॉफ्टवेयर में एरर.. टेक्नोलॉजी कब टेंशन दे दे, पता नहीं। इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की तेज रफ्तार दुनिया के अगर फायदे हैं, तो नुकसान भी हैं। अब वन विभाग ने आईटी प्रोफेशनल्स को कुदरत के करीब ले जाकर टेंशन दूर करने की योजना बना रहा है।



वन विभाग आईटी पार्क के सामने लगभग 13 एकड़ में नेचर ट्रेल बनाने जा रहा है। यहां आईटी प्रोफेशनल्स के लिए मेडिटेशन हट, विजिटर्स रेन शेल्टर्स, खूबसूरत फूलों की बगिया बनाई जाएगी। ऐसे पेड़ लगाए जाएंगे जिसमें पक्षी अपना बसेरा बना सकें। विभाग के डिप्टी कंजर्वेटर फॉरेस्ट सौरभ कुमार कहते हैं, ‘आईटी पार्क काफी मैकेनाइज्ड एरिया है।



यहां कर्मचारी और अधिकारी तकनीकी कामों में उलझे रहते हैं, उन्हें तकनीकी दुनिया से प्राकृतिक दुनिया में लाने के लिए नेचर ट्रेल बनाई जा रही है। इसमें खास होगा मेडिटेशन हट, जहां पर ये लोग प्राकृतिक माहौल में कुछ पल ‘ध्यान’ लगा सकेंगे और स्वस्थ रहेंगे। प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो चुका है। मार्च 2010 तक यह तैयार हो जाएगा।’



चंडीगढ़ बना ‘ग्रीनेस्ट सिटी ऑफ एशिय़ा’



फाइनेंस कम फॉरेस्ट सेक्रेटरी संजय कुमार ने बताया विभाग के प्रयासों से ही शहर का वन क्षेत्र 35.7 फीसदी हो गया है। इससे शहर को ‘ग्रीनेस्ट सिटी ऑफ एशिया’ का दर्जा हासिल हो गया है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय वन नीति के तहत किसी भी शहर के पर्यावरण संतुलन के लिए 33 फीसदी वन क्षेत्र होना चाहिए। इस वर्ष 71 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया था। विभाग ने 6 माह में 84,482 पौधे लगाए। कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट एवं वाइल्ड लाइफ ईश्वर सिंह ने बताया कि निकट निकट भविष्य में शहर को और हराभरा बनाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।

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