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Saturday, November 07, 2009 02:56 [IST]  

danik bhaskarबस ! अब बर्दाश्त नहीं होता

Bhaskar News

रोहतक. महंगाई की मार सोसाइटी में रहने वाले हर आम व खास आदमी पर पड़ी है। महंगाई इतनी बेलगाम हो चुकी है कि अब सरकार ने भी अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे में लोगों को अपनी बुनियादी जरूरतें ही पूरी करने में विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।



स्कूल कालेज में बच्चों की फीस बढ़ गई है, पेट्रोल -डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के नाम पर स्कूल बसों ने किराया बढ़ा दिया, कॉपी किताबें, कपड़े इत्यादि की कीमतें भी ऊपर हैं। बाजार से जो थैला सौ रुपए की हरी सब्जी से भरता था, वह आज 250 से 300 खर्च करने के बाद भी खाली रहता है।



कुल मिलाकर दिनचर्या में शामिल होने वाला हर काम महंगा हो चुका है। महंगाई से निपटने कुछ एफएमसीजी कंपनियों ने कीमतों को न बढ़ाकर अपने प्रोडक्ट के वजन को कम कर दिया है। टैक्स भरने के बाद भी लोगों को बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।



कुल मिलाकर महंगाई ने हर परिवार की बुनियादी जरूरत रोटी, कपड़ा और मकान पर गहर असर डाला है। पिछले साल के मुकाबले इस साल खाद्यान्न सहित रोजमर्रा की सभी वस्तुओं में 20 से 50 प्रतिशत तक की तेजी आ चुकी है और आगे इनमें किसी भी प्रकार से मंदी की गुंजाइश नहीं है।



हालांकि सरकारी और निजी क्षेत्र की नौकरियों में लोगों के वेतन में बढ़ोत्तरी हुई है, जिससे उपभोक्ता की क्रय शक्ति में बढ़ोत्तरी हुई है। इसके बावजूद महंगाई इतीन तेजी से बढ़ी है कि आदमी का बजट एकदम से गड़बड़ा गया है। रोजमर्रा काम आने वाली वस्तुएं पावडर, हेयर ऑयल, क्रीम, बिस्किट, ब्रेड, पोहा, खाद्यान्न, गैस सिलेंडर हो या सुबह का नाश्ता, सब पर महंगाई काबिज हो चुकी है।



जितना खाना, उतना ही बनाना



अब तो जितना खाना है उतना ही बनाया जाता है। टूथ पेस्ट से मच्छर मारने की टिकिया तक सभी महंगा हो गया है। तीन बच्चों के परिवार का पांच हजार रुपए में मासिक किराना आता था, वहीं अब सात से आठ हजार तक पहुंच गया है। - मधु गुलिया, गृहिणी, आनंदपुरा।



कम हो रहा है उत्पादन



वायदा बाजार में सट्टेबाजी और कृषि मंत्री के बयानों से खाद्यान्नों की कीमतों में तेजी की धारणा बनी है। शकर, चावल व दलहनों का उत्पादन भी कम है। गेहूं, धान आदि में समर्थन मूल्य में की गई बढ़ोत्तरी भी महंगाई बढ़ने का कारण है। - डा. एसएस राना, प्राध्यापक अर्थशास्त्र।



नहीं चल रहा काम



महंगाई बढ़ने से रसोईघर ही नहीं पेट्रोल का बजट भी गड़बड़ा गया है। छटवां वेतनमान लागू होने से तनख्वाह में डेढ़ हजार रुपए की बढ़ोतरी हुई, लेकिन काम नहीं चल रहा है। दाम इतने बढ़ गए हैं कि बचत कर पाना मुश्किल हो गया है। - कंवल सिंह, जेई, बिजली विभाग।



वैट टैक्स का खास असर नहीं



कुछ वस्तुओं पर वैट टैक्स बढ़ा है जिसका कीमतों पर कोई खास असर नहीं है। महंगाई बढ़ने का प्रमुख कारण जनसंख्या बढ़ना और देश में खाद्यान्नों की उपज घटना है। पैेसे का फ्लो बढ़ा है, क्रय शक्ति में इजाफा भी देखने को मिल रहा है। - संजय जैन, चार्टर्ड अकाउंटेंट



खर्चो में की कटौती



महंगाई इतनी बढ़ गई है कि खर्चो में कटौती करनी पड़ रही है। पहले तो हम 15 दिन में एक बार होटल में खाना खाते थे, लेकिन अब 2-3 महीने में एक बार होटल जाते हैं। दालों की जगह राजमा, लोभिया या फिर सब्जी का उपयोग ज्यादा कर रहे हैं। - संजना चावला, गृहिणी माडल टाउन



दस फीसदी किया महंगा



खाद्यान्नों में आई महंगाई के असर से रेस्त्रां में खाना 10 प्रतिशत तक महंगा करना पड़ा है। हालांकि खाने की कीमतें बढ़ाने का कोई खास असर नहीं पड़ा है। अच्छा भोजन पसंद करने वाले ग्राहक होटल में बराबर आ रहे हैं। - राहुल शर्मा, होटल संचालक।

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