..तो सीतापुरा बन जाती पुरा की ढाणी
झुंझुनूं. उस तबाही का अंदाजा लगाइए जब किसी एक रसोई गैस सिलैंडर में नहीं सिलैंडरों से भरे गोदाम में ही आग लग जाए और आस-पास पूरा गांव बसा हो। जान-माल के नुकसान का आकलन मुश्किल हो जाता। मगर शुक्रवार को फायर ड्रिल के नाम पर रसोई गैस के गोदाम कैंपस में आग जलाकर इसी हादसे को दावत देने की कोशिश की गई।
शायद ऐसा करने वालों ने सीतापुरा में हुए हादसे से सबक नहीं सीखा। जयपुर के सीतापुरा स्थित आईओसी टर्मिनल के अग्निकांड के बाद ऐसी स्थिति से निबटने में अपनी व्यवस्था और क्षमता का पता लगाने के लिए शहर से सटे पुरा की ढाणी गांव में स्थित रसाई गैस गोदाम कैंपस में प्रशासन ने जानबूझकर आग जलवाई।
जबकि फायर रिहर्सल में आग जलाने का कोई प्रावधान ही नहीं है। पेट्रोल-डीजल के रिसने का तो पता चल जाता है, मगर गैस को दिखती भी नहीं। शुक्र है कि कुछ हुआ नहीं, पर ऐसी लापरवाही एक पूरे गांव के लिए कितनी घातक हो सकती थी, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।
माजरा समझ आने के बाद नाराज गांववालों का कहना है कि सावधानी का सबक लेने का मतलब यह तो नहीं कि गांव की जान जोखिम में डाल दी जाए। मगर शुक्रवार को फायर ड्रिल के नाम पर गैस गोदाम के कैंपस में टायर और लकड़िया जलाकर प्रशासन ने ऐसी ही नादानी दिखाई।
जबकि गैस गौदाम के मालिक ने भी ऐसा नहीं करने का आग्रह भी किया था, मगर आग लगाने पहुंचे एसपी ऑफिस के विशेष शाखा के लोगों ने इसकी परवाह नहीं की। पुरा की ढाणी में बने आईओसी के गैस गोदाम में भरे हुए सैकड़ों सिलेंडर अंदर और बाहर कैंपस में रखे रहते हैं।
कैंपस में बीड़ी पीना तक प्रतिबंधित है, मगर शुक्रवार को फायर ड्रिल के नाम पर वहां टायर और लकड़ियां जलाकर आग लगवा दी गई। गैस गोदाम के संचालक ने मना भी किया, मगर वे माने नहीं। गैस गोदाम में शुक्रवार सुबह आग की लपटें उठते देख लोग घबरा गए। फायर और पुलिस की गाड़ियों के सायरन सुनकर ग्रामीण सकते में आ गए। लोग किसी बड़े हादसे की आशंका के चलते घरों से बाहर निकल कर सड़क पर आ गए।
पुलिस कंट्रोल रूम से सूचना पाकर मौके पर पहुंचे अग्निशमन बेड़े ने आग पर काबू पा लिया, जिससे बड़ा हादसा नहीं हुआ। आईओसी के बाकरा गैस प्लांट मैनेजर समरेशकुमार व आग बुझाने वाले सहायक दस्ते के सदस्य अमित भी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। बाद में फायर ड्रिल रिहर्सल होने का पता चलने पर स्थिति कुछ सामान्य हुई। फायर ड्रिल के नाम पर पूरे
गांव को खतरे में डालने की बात पता चलते ही गांववालों में नाराजगी फैल गई। उनका कहना है कि पूरे गांव को जोखिम में डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इधर प्रशासन इसे सामान्य सी बात मान रहा है।
प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
पुरा की ढाणी के बाशिंदों ने गैस गोदाम परिसर में आग लगाकर रिहर्सल करने की घटना की निंदा करते हुए प्रशासन पर उनकी जान जोखिम में डालने का आरोप लगाया है। लोगों ने बताया कि गैस गोदाम में आग लगने की सुनकर पहले तो उन्होंने भी यही सोचा था कि आग लगने की घटना से बचने के लिए होने वाली रिहर्सल है।
लेकिन बाद में जब आग की लपटें ऊंची हुई और धुएं का गुबार उठने लगा तो गांव वालों के होश उड़ गए और घरों से बाहर निकल आए। ग्रामीणों ने इस घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
कैसा फायर ड्रिल
पुरा की ढाणी स्थित गैस गोदाम में फायर रिहर्सल की खबर चिकित्सा महकमे को छोड़कर सभी संबंधित के पास थी। जिसके चलते पुलिस प्रशासन व अन्य अधिकारी, मीडियाकर्मी आदि मौके पर पहले से ही मौजूद थे। जानकारी के अभाव में घटना के करीब एक घंटे बाद तक भी मेडिकल टीम वहां नहीं पहुंची पाई थी। नगरपरिषद आयुक्त भी नहीं पहुंचे थे।










