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Saturday, November 07, 2009 03:11 [IST]  

danik bhaskarजयपुर के धुएं में अटा शहर

Bhaskar News

rohtakरोहतक. जयपुर के सीतापुर स्थित इंडियन आयल डिपो में लगी आग से निकले धुएं से शुक्रवार को रोहतक भी अट गया। धुएं का असर करीब ग्यारह बजे तक रहा। धुएं के कारण लोगों को आंखों में जलन व सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ा।



शुक्रवार को रोहतक के लोग अलसुबह उठे तो आसमान में फैले धुएं को देखकर हैरान रह गए। एक पल के लिए लोगों को माजरा समझ में ही नहीं आया। लोग अपने घरों से बाहर निकले तो देखा कि शहर धुएं से अटा हुआ है। बुजुर्र्गो से लेकर छोटे बच्चों तक हर किसी की आंखों में जलन व सांस लेने में दिक्कत महसूस हुई।



स्कूली बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ी। यह सिलसिला करीब ग्यारह बजे तक देखने को मिला हालांकि धुएं का गुब्बार शाम तक बना रहा। काबिलेजिक्र है कि 29 अक्टूबर को जयपुर स्थित आयल डिपो में आगजनी की घटना हुई थी। इसके बाद जयपुर व आसपास का क्षेत्र काले धुएं की चपेट में आ गया था।



सैर करने वाले रहे परेशान



रोजाना की तरह शहर के हजारों लोग अलसुबह पार्र्को में घूमने निकले तो उन्हें खासी परेशानी उठानी पड़ी। पार्र्को से लेकर शहर के स्टेडियमों तक धुएं का प्रकोप देखने को मिला। कुछ लोग तो बगैर सैर किए वापस लौट आए जबकि कुछ ने पार्र्को में बैठकर समय गुजारा।



धुआं होता है शरीर के लिए हानिकारक



पीजीआईएमएस के मेडिसन डिपार्टमेंट के सीनियर डाक्टर एचके अग्रवाल व सीनियर मेडिकल आफिसर डा. शिव कुमार के अनुसार जयपुर में जो हादसा हुआ है, उससे मौसम पर तो असर पड़ता है, साथ ही शरीर पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।



धुएं की चपेट में आने पर सांस, आंखों में जलन व स्किन की बीमारियां होने की संभावना बढ़ जाती हैं। इससे बचने का एक ही तरीका है कि कम से कम घर से निकलना चाहिए और बाहर से वापस आने पर मुंह को साफ पानी से जरूर धोना चाहिए।



आठ दिन बाद शहर आया चपेट में



जयपुर स्थित आयल डिपो में आठ दिन पूर्व आगजनी की घटना हुई थी। इसके बाद जयपुर के आसपास का इलाका धुएं से अट गया था। मगर आठ दिन पूर्व लगी आग के धुएं का असर रोहतक में भी देखने को मिला। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के डा. सुधीर बंसल व डा. महताब सिंह कहते हैं कि गर्मी-सर्दी मिक्स हो रही है।



अमूमन साल के कई माह हवा का रुख राजस्थान की तरफ से ही रहता है। संभावना है कि इस हवा के कारण ही धुआं इधर आ गया। अगर हवा तेज होती तो धुआं पहले ही आ जाता। इसलिए कहा जाता है कि लोग पौधों को तवज्जो दें वरना पृथ्वी को खत्म होने में देर नहीं लगेगी।



ऐसा पहले कभी नहीं हुआ



जयपुर में कई दिन पहले जो घटना हुई, उसका असर रोहतक में आज देखने को मिला। मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि ऐसा हो सकता है। सुबह देखा तो आकाश में धुआं ही धुआं नजर आया। - डा. आनंद शर्मा निवासी सेक्टर-एक



आंखों में जलन महसूस हुई



सुबह मार्निंग वाक के लिए निकला तो आंखों में जलन महसूस हुई। पूरे कैंपस में धुआं-धुआं ही नजर आया। सर्दी में धुंध जरूर नजर आती थी लेकिन अब धुएं ने भी अपना असर दिखाया है। - बलजीत सिंह प्राध्यापक, राजकीय महिला महाविद्यालय

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