76 साल बाद घड़ी देख बोले-चल रही है
कोटा. हर्बट कॉलेज के किसी जमाने में छात्र रहे डॉ. मिसबाउद्दीन अहमद ने शुक्रवार को राजकीय महाविद्यालय का अवलोकन किया तो उनकी पुरानी यादें ताजा हो उठी। इस अवसर पर डॉ. अहमद का अभिनंदन किया गया।
डॉ. मिसबाउद्दीन अहमद ने बताया कि कोटा के हर्बट कॉलेज (राजकीय महाविद्यालय) में वर्ष 1932 से 36 तक पढ़ाई कर मैट्रिक पास की। इसके बाद इंटरमीजिएट लखनऊ से किया और एमबीबीएस करने लाहौर चला गया। लाहोर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने के बाद वहीं जॉब मिल गया।
वर्ष 1947 में भारत-—पाक विभाजन हो गया। इसके बाद से भारत आने के लिए वीजा नहीं मिला। उन्होंने बताया कि 25 साल पहले भारत आया, लेकिन कोटा में रह रहे छोटे भाई डॉ. शफीउद्दीन अहमद से मिलने नहीं आ सका। इसके बाद अब कोटा आया तो हर्बट कॉलेज देखने की मन में लालसा जागृत हुई और शुक्रवार को परिजनों के साथ कॉलेज देखने पहुंच गए।
उन्होंने प्राचार्य एवं ओल्ड बॉयज एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ स्टाफ रूम, लाइब्रेरी, कम्प्यूटर लैब कॉलेज का अवलोकन किया। स्टाफ रूम को देखते ही बोल उठे हमारे जमाने में यहा पुस्तकालय हुआ करता था। कक्षा कक्ष को देखकर बोल उठे इस कक्ष में भूगोल पढ़ा करते थे। कॉलेज में लगी घड़ी को चालू देखकर बोले—उठे वाह आज भी चल रही है।
कॉलेज प्राचार्य एवं स्टाफ सदस्यों ने डॉ. मिस बाउद्दीन का अभिनंदन किया। इस अवसर पर उपाचार्य आरपी पांडे,ओल्ड बॉयज एसोसिएशन के नंदन भार्गव, व्याख्याता डॉ. कमरजहां, डॉ.मोहम्मद नईम, जेडीबी कॉलेज की व्याख्याता डॉ.नादिरा आदि मौजूद थे।










