कैंसर से हर साल मालवा में मर जाते हैं सैकड़ों लोग
पटियाला. मालवा क्षेत्र में हर साल सैकड़ों लोग कैंसर से मौत के मुंह में चले जाते हैं। इसका मुख्य कारण है मरीजों का समय पर इलाज न हो पाना। वर्ष 2006 के दौरान अस्पताल में 9000 ब्रेस्ट, छाती, मुंह, गले व बच्चेदानी कैंसर के मरीज इलाज करवाने के लिए पहुंचे। इनमें से करीब 150 मरीजों की उपचार के दौरान ही मौत हो गई। जबकि कुछ उपचाराधीन हैं।
इसी तरह वर्ष 2007 के दौरान मरीजों की संख्या में कुछ कमी आई। इस साल करीब 7500 मरीज इलाज के लिए राजिंदरा अस्पताल पहुंचे जिनमें से 160 लोगों की मौत हो गई, जबकि वर्ष 2008 के दौरान 8500 मरीज इलाज करवाने के लिए पहुंचे इनमें से 170 मरीजों की इलाज के दौरान ही मौत हो गई। वर्ष 2009 के दौरान कैंसर के मरीजों की संख्या में थोड़ी कमी आई है। जनवरी से अक्टूबर तक करीब 3500 कैंसर मरीज रेडियोथैरेपी विभाग में इलाज करवाने के लिए पहुंचे।
अत्याधुनिक संशाधनों से नहीं जुड़ पाया राजिंदरा: मालवा क्षेत्र के सबसे बड़े अस्पताल राजिंदरा में प्रति वर्ष हजारों की संख्या में कैंसर के मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन अस्पताल अभी भी मार्डन मशीनरी के लिए तरस रहा है। यहां पर कैंसर डाइगनोज करने वाली मैमोग्राफी मशीन ही अभी तक नहीं लग पाई है। इसके लिए मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
कई मामलों में तो मरीज के कैंसर का डाइगनोज होता है तब तक वह आखिरी स्टेज में पहुंच जाता है। इस संबंध में जब अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डा. अविनाश गोयल ने बताया कि महिलाओं में होने वाले स्तन कैंसर को डाइगनोज करने के लिए अस्पताल में जल्द ही मैमोग्राफी मशीन लगने जा रही है। मशीन से कैंसर का पता लगते ही तुरंत इलाज शुरू किया जाएगा। डा. गोयल ने बकाया कि अस्पताल में ब्रेकीथैरेपी मशीन लगाई गई है।










