निर्माणरहित क्षेत्र के लिए 129 बीघा जमीन चिह्न्ति
अजमेर नगर निगम साधारण सभा की आगामी बैठक में आनासागर झील के भराव क्षेत्र को निर्माण रहित क्षेत्र घोषित करने के लिए प्रस्ताव पारित करेगा। उधर, फैसले में देरी होने से झील के भराव क्षेत्र में निरंतर निर्माण हो रहे हंै। सिंचाई विभाग ने झील की 128 बीघा से अधिक भूमि को चिह्न्ति किया है।
कामन कॉज सोसायटी बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य की उच्च न्यायालय में दायिर रिट के बाद अदालत के निर्देशानुसार सिंचाई विभाग ने भराव एवं खतरनाक जोन की जमीन के खसरा नंबर चिह्न्ति किए थे। निगम को इन खसरों की जमीन को निर्माण रहित क्षेत्र घोषित कर सरकार को भेजना है।
सिंचाई विभाग ने झील के भराव और खतरनाक जोन के लिए कुल खसरा संख्या 151 में 128 बीघा 12 बिस्वा से अधिक भूमि को चिह्न्ति किया है। सिंचाई विभाग ने जो भूमि चिह्न्ति की है, इसमें निर्माणाधीन आवास, कब्रिस्तान सहित अन्य जमीन भी शामिल है। निगम नवंबर के अंतिम सप्ताह में संभावित साधारण सभा की बैठक में यह प्रस्ताव पारित कर सरकार को भेजेगा। इससे पूर्व यह प्रस्ताव 13 अक्टूबर को हुई साधारण सभा की बैठक में ही पारित होने वाला था लेकिन समय ज्यादा हो जाने के कारण प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हो पाई।इस संबंध में मेयर धर्मेद्र गहलोत का कहना है कि आगामी साधारण सभा की बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी।
लंबे समय से कवायद
आनासागर झील के भराव क्षेत्र में अतिक्रमण रोकने के लिए झील के भराव क्षेत्र को निर्माणरहित क्षेत्र घोषित करने की लंबे समय से ेकवायद चल रही है, लेकिन अधिकारियों की अरुचि के कारण स्थिति जस की तस है। सरकारी मशीनरी की अनदेखी के कारण भराव क्षेत्र में अतिक्रमणों की बाढ़ आ गई। संबंधित विभागों के सामने निर्माण होते रहे, लेकिन उन्होंने कोई कार्यवाही नहीं की। अब मामला न्यायालय में चले जाने की वजह से प्रशासन को मजबूरी में यह कार्यवाही करनी पड़ रही है।
सरकारी खातेदारी की जमीन
आनासागर झील के भराव और खतरनाक जोन के लिए जो खसरा चिह्न्ति किए गए हैं। उनमें से आधे से ज्यादा खातेदारी की जमीन है। इसके अलावा कुछ सरकारी जमीन है। प्रशासन पूरी जमीन को अधिग्रहण करता है तो करोड़ों रुपए की आवश्यकता पड़ेगी। इसके चलते प्रशासन क्षेत्र को निर्माण रहित घोषित करने में लगा है ताकि झील की जमीन की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं हो।











