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Saturday, November 07, 2009 03:56 [IST]  

danik bhaskarचिंता से बेहतर सुरक्षा

भास्कर न्यूज

animal protectionभोपाल. वन्य प्राणियों की सुरक्षा की ओर पहले ध्यान देना जरूरी है। उसके बाद ही वन्य प्राणियों के शिकार मामलों की विवेचना और आरोपियों को सजा दिलाने की चिंता करनी चाहिए। ये विचार शुक्रवार को वन्य प्राणी अपराध विवेचना के प्रशिक्षण समापन कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने व्यक्त किए।



वन मंत्री सरताज सिंह ने कहा कि वन्य प्राणियों के मरने के बाद चिंता करने से बेहतर होगा कि हम उनकी सुरक्षा की ओर ध्यान दें। उन्होंने पुलिस और वन विभाग को समन्वय से काम करते हुए वन्य प्राणी शिकार की सूचनाओं का आदान-प्रदान करने को भी कहा। वन्य प्राणी अपराध नियंत्रण ब्यूरो द्वारा आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में पुलिस और वन विभाग के 55 अधिकारी शामिल हुए। वन्य प्राणी अपराध नियंत्रण ब्यूरो की अतिरिक्त संचालक रीना मित्रा ने कहा कि वाइल्ड लाइफ के अपराधियों की हिस्ट्रीशीट तैयार की जानी चाहिए। पुलिस और वन विभाग के बीच वन्य प्राणी अपराध की खुफिया सूचनाओं का जिला स्तर पर भी आदान-प्रदान होना चाहिए।



दैनिक भास्कर के स्टेट एडिटोरियल हेड अभिलाष खांडेकर ने थाईलैंड का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां जब तितलियों का माइग्रेशन होता है तो राष्ट्रीय राजमार्ग बंद कर दिए जाते हैं। मगर हमारे यहां राष्ट्रीय पार्को में सड़कें बनाई जाती हैं। इंदौर में एक समय चारों तरफ हरियाली थी, आज वहां पेड़ दिखाई नहीं देते। कमोबेश यही स्थिति भोपाल में बनती जा रही है।



उन्होंने कहा कि वन और वन्य प्राणी अधिनियम के प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। कार्यक्रम के अंतिम दिन डीजीपी एसके राउत, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एके दुबे, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) आरएस नेगी, वन्य प्राणी अपराध नियंत्रण ब्यूरो की अतिरिक्त संचालक रीना मित्रा, मुख्य वन संरक्षक एके भट्टाचार्य, पत्रकार सुरेंद्र तिवारी भी शामिल हुए।



अवैध शिकार करने वालों से निपटना बड़ी चुनौती : रीना मित्रा



वन्य प्राणी अपराध नियंत्रण ब्यूरो की अतिरिक्तसंचालक रीना मित्रा का कहना है कि वन्य प्राणियों का शिकार करने वाले अपराधियों के नेटवर्क पर पैनी नजर रखी जा रही है। सभी राज्य सरकारों को आगाह किया गया है कि वे वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए बेहतर तंत्र विकसित करें जिसमें पुलिस, इंटेलीजेंस तथा वाइल्ड लाइफ विभाग के अधिकारियों का समन्वय हो।



भोपाल प्रवास पर आईं सुश्री मित्रा ने दैनिक भास्कर से चर्चा में कहा कि टाइगर स्टेट के नाम से पहचाने जाने वाले मप्र में बाघों की संख्या का कम होना चिंताजनक है। हालांकि यहां जो व्यवस्थाएं संचालित हैं वे बहुत अच्छी हैं। हमारे सामने अब चुनौती अवैध शिकार करने वालों से निपटने की है। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ग विशेष के लोगों को अपराधी तत्व शिकार में इस्तमाल कर रहे हैं।



चीन में फल-फूल रहे अवैध शिकार के बाजार पर उन्होंने कहा कि इसे लेकर केंद्र सरकार गंभीर है और अंतरराष्ट्रीय फोरम पर इसके खिलाफ आवाज उठाई जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की पहल पर वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल बोर्ड की स्थापना दो साल पहले ही हुई है। देश भर में अभी टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स भी गठित हो रही है जो बाघ संरक्षण की दिशा में कार्य करेगी।

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