सस्ते मकानों के लिए धन की कमी नहीं आएगी
जयपुर. राज्य में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सस्ते मकान उपलब्ध कराने में कई वित्तीय संस्थाओं ने रुचि दिखाई है।
ये संस्थाएं इसके लिए ऋण देने को तैयार हो गई हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय वित्त कारपोरेशन, राष्ट्रीय आवासन मंडल और विभिन्न बैंक शामिल हैं। सस्ते आवास योजना के लिए राजस्थान को रोल मॉडल के रूप में चुना गया है। स्वायत्त शासन, नगरीय विकास एवं आवासन विभाग के प्रमुख सचिव जी.एस. संधू की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई बैठक में इन वित्तीय संस्थाओं ने सस्ते आवासों के लिए पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया।
एसीटीओ का तबादला निरस्त : राज्य सरकार ने शुक्रवार को एक आदेश जारी करके एसीटीओ के. के. बोराना का तबादला निरस्त कर दिया है। बोराना का तबादला वार्ड प्रथम, वृत्त बी अजमेर में किया गया था।
संधू ने बताया कि राज्य सरकार एकीकृत कच्ची बस्ती विकास तथा शहरी गरीबों के लिए आधारभूत विकास कार्यक्रम के तहत अगले 5 साल में 1.25 लाख मकान बनाए जाएंगे। इनमें 50 हजार राजस्थान आवासन मंडल और 75 हजार मकान नगरीय निकाय, नगर विकास न्यास, जयपुर, जोधपुर विकास प्राधिकरण और निजी क्षेत्र बनाएगा।
आवास नीति के तहत पांच तरह मॉडल रखे गए हैं। इनमें पहले मॉडल में राजस्थान आवासन मंडल की ओर से बनाए जाने वाले कुल मकानों में 50 प्रतिशत आर्थिक रूप से कमजोर और अल्प आय वर्ग के लिए आरक्षित रखने होंगे। जेडीए, नगर निगम और नगर विकास न्यासों के लिए कुल आवासों में इस वर्ग के लिए 25 प्रतिशत और निजी विकासकर्ताओं को 15 प्रतिशत मकान इस वर्ग के लिए आरक्षित रखने होंगे।
दूसरे मॉडल में निजी विकासकर्ताओं की ओर से प्राइवेट जमीन पर आवास बनाए जाने की स्थिति में इन वर्गो के लिए 40 प्रतिशत आरक्षण करना होगा। जबकि अधिग्रहीत जमीन पर आवासीय योजना बनाने की स्थिति में इन वर्गो के लिए बहुमंजिले आवास बनाने होंगे। चौथे मॉडल सरकारी भूमि पर समूह आवासीय योजनाएं बनाई जाएंगी। जबकि पांचवें मॉडल में वर्तमान में चल रही योजनाओं के तहत ही कच्ची बस्तियों के लिए आवास बनाए जाएंगे।










