पाटों पर दावे, पार्टियों में हलचल
बीकानेर. सात तारीख से शुरू होने वाले नामांकन को देखते हुए शुक्रवार का दिन राजनीति करने वालों के लिए काफी हलचल भरा रहा। कांग्रेस और भाजपा के नेताओं के अलावा बसपा और तीसरे मोर्चे के नेता भी अपनी-अपनी तैयारियों में लगे रहे तो दूसरी ओर पार्टी-पॉलीटिक्स से दूर पाटों पर हर दावेदार का सत्कार होता रहा।
दावेदारों ने भी पूरे मन से अपनी तैयारियां बताई। टिकट मिलते ही पीछे जुटने वाले कार्यकर्ताओं की सूची गिनाई और वोटों के इन्फ्लॉज गिनाए। दम्माणी चौक, मोहता चौक, लखोटिया चौक, आचार्य चौक, भट्ठड़ों के चौके के पाटे इसी तरह के गुणा-भाग में व्यस्त रहे तो नत्थूसर गेट पर तो राजनीति की मानो चौसर ही बिछ गई।
नत्थूसर गेट पर राजनीति रात होने के साथ परवान चढ़ी लेकिन पाटे तो दिनभर मशगूल रहे। एक दावेदार-पति दौड़ा-दौड़ा दोपहर में आया और पाटे को जानकारी दी कि जयपुर से फोन आ गया है। धर्मपत्नी से पूछा गया कि आप को टिकट दिया जा सकता है लेकिन पहले कुछ सवालों का जवाब दो। इसके बाद शुरू हुआ सवालों का दौर।
धर्मपत्नी ने बगैर झिझके सारे सवालों के जवाब तो दे दिए हैं। कांग्रेस से टिकट के लिए अपनी पत्नी की दावेदारी करने वाले इन पति के साथ टेलीफोनिक वार्ता की खबर जैसे ही शहर में फैली वैसे ही पाटों पर कई दावेदारों के फोन आने की खबर आने लगी। अचानक प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से सीधे दावेदारों के घर फोन आने लगे और शाम तक टिकटें भी फाइनल हो गई थी। कमोबेश ऐसी ही स्थिति भाजपा की थी।
सुबह जहां भाजपा के नेताओं को घर से बाहर निकलते ही इस सवाल का सामना करना पड़ा कि अब देवीसिंह भाटी के सर्वे के आगे आपका क्या होगा? वहीं शाम होते-होते घर चौक में पहुंचे नेता लोग बता रहे थे कि पैनल दे दिया है। टिकट तो फलाणिये को ही मिलेगी। फिर दिनभर चले राजनीतिक घटनाक्रम का हवाला दिया गया। सिद्धिबाइसा के घर लगी चौपाल की जानकारी दी गई। पाटे से फिर सवाल आया ‘बठै, देवीसिंहजी आया है कईं?’ इस सवाल का जवाब नहीं में मिला और इसके साथ ही पाटे का अपना विश्लेषण शुरू हो गया।
पाटे पर नई-नई जानकारियां पहुंचती रही, चटखारे लिए जाते रहे। किसी के राहुल गांधी की मुद्रा में खिंचवाए गए फोटो चर्चा में थे तो किसी ने जनसंपर्क शुरू कर दिया है, ऐसी खबर थी। पोस्टर-पैंफलेट दीवारों पर लगने के अलावा वार्डवासियों को शुभकामनाएं देने वाले फ्लैक्स चर्चा के केंद्र में थे। रात को नत्थूसर गेट के अंदर और बाहर जमघट लगने शुरू हुए। यहां दावेदारों के पैरोकारों की फौज थी। हार-जीत के दावे थे और पूरी रात थी इसके लिए।










