Danik Bhaskar Logo
| 42 Editions | 10 States

Saturday, November 07, 2009 04:13 [IST]  

danik bhaskarफैला फ्लू का कहर, 6 और बच्चे चपेट में

Bhaskar News

Swine Flu जयपुर. राज्य में स्वाइन फ्लू फैलता जा रहा है। शुक्रवार को 12 मरीजों को इस फ्लू से पीड़ित पाया गया। इनमें 10 अकेले जयपुर के हैं। जयपुर के मरीजों में एसएमएस स्कूल के छह बच्चे और चार अन्य मरीज हैं। जोधपुर और कोटा के एक-एक मरीज भी पॉजिटिव पाए गए।



इस बीच राज्य में स्वाइन फ्लू से मरने वालों की तादाद 13 हो गई है। कोटा में गुरुवार रात को दम तोड़ने वाली बीना शर्मा की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। पिछले मामलों की तरह बीना की रिपोर्ट भी मौत के बाद आई। एसएमएस अस्पताल में शुक्रवार को स्वाइन फ्लू के 10 संदिग्ध मरीजों की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई, जबकि दो पॉजिटिव निजी लैब के हैं।



उधर, एमजीडी स्कूल में एक बालिका को स्वाइन फ्लू पॉजिटिव पाए जाने के बाद स्कूल प्रबंधन ने 11 नवंबर तक प्राइमरी सेक्शन की छुट्टी घोषित कर दी है। जयपुर के चार अन्य पॉजिटिव में गौरीशंकर (56), बीना (24), तृप्ति (26) और प्रियंका (19) हैं। एसएमएस स्कूल की मीडिया कॉर्डिनेटर विनीता माथुर ने 20 स्टूडेंट्स में स्वाइन फ्लू की पुष्टि की।



स्वाइन फ्लू का जिक्र, अपनी-अपनी फिक्र



जयपुर. कई स्कूली बच्चे स्वाइन फ्लू की चपेट में होने की पुष्टि के बाद शुक्रवार को शहर के कई प्रमुख स्कूल खुले रहे। खास बात यह है कि जहां शिक्षकों और अभिभावकों को मर्ज फैलने की फिक्र थी, वहीं बच्चे दूसरे स्कूलों की तरह छुट्टी नहीं होने पर अफसोस जता रहे थे। हालांकि बड़ों से लेकर बच्चों तक की बातों के केंद्र में स्वाइन फ्लू ही था।



एमजीडी, सेंट जेवियर, विद्याश्रम, आईआईएस, सिडलिंग,स्टेप बाय स्टेप, निरजा मोदी स्कूल के प्रिंसिपल और टीचर स्वाइन फ्लू पर चिंतन बैठक करते रहे, जबकि इस रोग से बेफिक्र बच्चे यह चर्चा करते नजर आए कि जब स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए कई स्कूल छुट्टी घोषित कर चुके हैं तो उनका स्कूल छुट्टी क्यों नहीं कर रहा है। इधर, स्वाइन फ्लू के बढ़ते खतरों से घबराए अभिभावक स्कूल के बाहर बैठकर बच्चों की छुट्टी होने का इंतजार करते मिले। ज्यादातर का कहना था कि स्कूल प्रशासन को गंभीरता बरतते हुए छुट्टी कर देनी चाहिए। अगर स्कूल छुट्टी नहीं घोषित करेगा तो वे स्वयं बच्चों को छुट्टी की इजाजत दे देंगे।



प्रार्थना सभा स्थगित



आईआईएस स्कूल के डायरेक्टर अशोक गुप्ता ने बताया कि स्कूल में सुबह की प्रार्थना सभा स्थगित कर दी है। नर्सेज द्वारा रोजाना चेकअप और डॉक्टर भी समय समय पर बच्चों को देख रहे है। स्वाइन फ्लू के बारे में जानकारी देने के लिए बच्चों के लिए दूसरी बार वर्कशॉप शुरू कर दी गई है, जिसके माध्यम से बताया जा रहा है कि गर्म पानी से दिन में दो तीन बार गरारे करें, हाथ, नाक, मुंह साफ रखे। अभिभावकों को गाइडलाइन भेजने के साथ ही फोन से बताया जा रहा है कि हल्का बुखार जुकाम होने पर बच्चे को स्कूल न भेजें।



बच्चें को समझाने के लिए वर्कशॉप



सेंट जेवियर्स स्कूल के प्रिंसिपल एफ.आर.जौस जैकब एस.जे. ने बताया एहतियात के तौर पर अभिभावकों को संदेश पहुंचाए गए है कि हल्का जुकाम बुखार होने पर बच्चे को स्कूल न भेजे। वर्कशॉप में बच्चों को समझाया गया कि फ्लू के मरीजों से दूर रहें और साफ सफाई का ख्याल रखें।



परिजनों को गाइडलाइन भेजी



डीपीएस स्कूल के प्राचार्य के.बी. कैन ने बताया कि सुबह की प्रार्थना सभाएं स्थगित कर रखी है। छात्रों के लिए वर्कशॉप और परिजनों को गाइडलाइन भेजी जा चुकी है।



मोर्निग एसेंबली में समझा रहे हैं

रियान इंटरनेशनल एवं एस.वी.पब्लिक स्कूल प्रशासन ने बच्चों को स्वाइन फ्लू से बचाने के लिए नर्सेज रखी हुई हैं। डॉक्टर रेगुलर चेकअप कर रहे हैं। बच्चों को रोजाना मॉर्निग असेंबली में स्वाइन फ्लू की रोकथाम पर समझाया जा रहा है।



पूर्ण स्वस्थ होने पर ही स्कूल भेजें



टीपीएस के डायरेक्टर पी.डी. सिंह ने बताया कि सुबह की प्रार्थना सभाएं रद्द कर दी गई है। अभिभावकों को सूचित किया गया है कि पूर्ण स्वस्थ्य होने पर ही बच्चों स्कूल भेजा जाए। स्कूल में डॉक्टर रूटीन चेकअप भी कर रहे है।



जांच के लिए बच्चें के परिवार परेशान



जयपुर. स्वाइन फ्लू से प्रभावित एसएमएस स्कूल के बच्चों की संख्या लगातार बढ़ने से चिंतित परिवारजनों को एसएमएस अस्पताल में जांच के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।



धन्वन्तरि आउटडोर में शुक्रवार को एक बच्चे को लेकर आएउसके पिता ओमप्रकाश ने बताया कि वहां पहले तो चिकित्सक को दिखाना पड़ता है, उसके बाद जांच के लिए राशि जमा कराने के लिए मेडिकल कॉलेज के काउंटर पर जाना पड़ता है और फिर रसीद लेने के बाद बाद सैंपल के लिए आइसोलेशन वार्ड में जाना पड़ता है। इसलिए अस्पताल प्रशासन की ओर से स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए अलग काउंटर तथा अलग चिकित्सक होना चाहिए।



कई परिवारजनों ने आरोप लगाया कि उन्हें जांच के लिए इसलिए मना कर दिया गया क्योंकि वे निजी चिकित्सकों से पर्ची लिखाकर लाए थे। उनका यह भी कहना था, प्रदेश में स्वाइन फ्लू तेजी से फैलने के बावजूद चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्कूलों में कोई जागरूकता कार्यक्रम नहीं चलाया जा रहा है। विभाग के अतिरिक्त निदेशक (ग्रामीण स्वास्थ्य) डॉ. बीआर मीणा ने बताया कि स्कूलों के लिए अखबारों में गाइडलाइन प्रकाशित की जाएगी।



जेके लोन में स्वाइन फ्लू वार्ड आज से



स्वाइन फ्लू के पीड़ित बच्चों की बढ़ती संख्या को देखते हुए शनिवार शाम से जेके लोन अस्पताल में एक वार्ड व आईसीयू शुरू हो जाएगा। अस्पताल के डे केयर सेंटर को स्वाइन फ्लू वार्ड तथा पुराने थैलेसीमिया वार्ड को आईसीयू में बदला जाएगा। अस्पताल अधीक्षक डॉ.डी.डी.सिन्हा ने बताया कि वार्ड 10 बेड का तथा आईसीयू चार बेड की होगी। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को आउटडोर में करीब दस बच्चे आए, जिनकी जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।



स्वाइन फ्लू के बारे में सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं



साधारण जुकाम इन्फ्लुएंजा ए के कारण होता है। मौसम बदलते समय अक्सर लोगों को हो जाता है। इसमें सांस लेने में मामूली तकलीफ होती है। इसके साथ एच वन ए वन वायरस शामिल हो जाता है तो इसकी तीव्रता बढ़ जाती है। एच वन एन वन वायरस सूअर और पक्षियों में पाया जाता है।



कैसे फैलता है वायरस : नाक, मुंह से कफ निकालते वायरस हाथ के संपर्क में आकर मोबाइल फोन, कंप्यूटर के की बोर्ड, दरवाजे के हैंडल, रिमोट कंट्रोल के जरिए दूसरे व्यक्तियों में पहुंच जाता है।



सबसे ज्यादा असर इन पर : गर्भवती महिलाएं, 65 से अधिक और 5 साल से कम उम्र के लोग, ह्रदय रोगी, गुर्दा रोगी, फेफड़े संबंधी न्यूरोलॉजिकल से संबंधित बीमारियां जैसे पार्किसंस वाले रोगी, अस्थमा के मरीज आदि है।



ये हैं भ्रांतियां



स्वाइन फ्लू रोगी के संपर्क से क्या मुझे भी फ्लू हो जाएगा।



निराकरण : लक्षण सात दिन में सामने आते हैं. डॉक्टर के संपर्क में रहे और लक्षण दिखते ही उपचार कराएं।



स्वाइन फ्लू के बाद में कब : सामान्य व्यक्ति पांच दिन में ठीक हो जाता है जबकि बच्चों में ठीक होने में सात से दस दिन का समय लग जाता है। इसके बाद काम पर लौटा जा सकता है।



संक्रमण की चपेट में : 100 देश, 70 हजार मरीज, 300 लोगों की मौत। भारत में 1078 मामले, 11 जनों की मौत। इसका वायरस टायफायड, निमोनिया व कैंसर जैसे विषाणु पैदा कर सकता है।



क्या स्वाइन दुबारा हो सकता हैः सामान्यतया साधारण फ्लू से इसकी शुरूआत होती है। ये सीजनल होता है। इसका वायरस सात दिन में मर जाता है। इसके बाद दुबारा शरीर में पनपने की संभावना नहीं होती।



क्या करें : हमेशा हाथ धोएं, मुंह पर रुमाल रखें, फ्लू के रोगी से दूरी बनाए रखें, द्रव्य अधिक मात्रा में सेवन करे, पोषक आहार लें, कमजोरी का अहसास होने पर नजदीकी चिकित्सक को दिखाएं, टिश्यू पेपर, मास्क का इस्तेमाल कर फेंके, रुमाल को रोज गर्म पानी से धोएं, फ्लू प्रभावित रोगी से दूर रहें।



क्या ना करें : आंखों को रगड़े और मले नहीं, मुहं और नाक को हाथों से ना छुएं, टिश्यू पेपर से खुले में कफ नहीं निकाले, फ्लू वाले रोगी से हाथ नहीं मिलाएं, शारीरिक व मानसिक तनाव से दूर रहें, अधिक खाने व उपवास से परहेज रखें, भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें, खुद अपना इलाज नहीं करें, उपयोग किया हुआ टिश्यू पेपर खुले स्थान पर नहीं डालें।

इलाज के लिए अधिकृत निजी अस्पताल



* फोर्टिस अस्पताल, मालवीय नगर

* सोनी अस्पताल, जेएलएन मार्ग

* एपेक्स अस्पताल, मालवीय नगर

* भंडारी अस्पताल, गोपालपुरा मोड

* रूंगटा अस्पताल, मालवीय नगर

* जयपुर अस्पताल, लालकोठी

* संतोकबा दुर्लभजी अस्पताल,

* एस.के. सोनी अस्पताल, सीकर रोड

* महात्मा गांधी अस्पताल, सीतापुरा

* स्टार अस्पताल, प्रतापनगर

* मोनिलेक अस्पताल, जवाहरनगर

* साकेत अस्पताल, मानसरोवर

* धन्वतरि अस्पताल, मानसरोवर



टेमी फ्लू के अधिकृत विक्रेता



मेडिकल स्टोर, भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल, जेएलएन मार्ग, मेडिलीफ केयर, तिलकनगर, डी.के. एंटरप्राइजेज, जवाहरनगर, देव फार्मा, एसएमएस अस्पताल जयपुर, फार्मावैल सेंटर जे.पी. फाटक के पास जयपुर।



जांच के लिए अधिकृत लैब



एसएमएस मेडिकल कॉलेज, एसआरएल लेबोरेट्री, डॉ. लाल पैथ लैब्स



* स्वाइन फ्लू की दवा

* दस दिन की गोली कीमत 499 रु.

* स्वाइन फ्लू का टेस्ट निजी में 4500 रु.

* सरकारी लैब में 3000 रु.

  share
apne vichaar
post a comment
name:
email:
website:
code:
 
select your language:
Hindi Roman Hindi Phonetic English
comment: