हां, सक्रिय हैं फर्जी प्रवेश दिलाने वाले गिरोह
इंदौर. फर्जी दस्तावेज के आधार पर एमबीबीएस में प्रवेश लेने वाले छात्रों का बड़ा रैकेट इंदौर सहित प्रदेशभर में चल रहा है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज में फर्जी प्रवेश लेने वाले ऐसे दो छात्र सत्यपाल सिंह और रवींद्र दुलावत के खिलाफ संयोगितागंज पुलिस ने शुक्रवार को धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है।
उधर, ग्वालियर में एक और सागर मेडिकल कॉलेज में नौ ऐसे ही फर्जी मामले सामने आए हैं। इसके मद्देनजर जब भास्कर ने डीएमई डॉ. वी.के. सैनी से पूछा तो उन्होंने स्वीकारा कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रवेश लेने वाले गिरोह सक्रिय हैं। मेडिकल कॉलेजों में इस तरह के बड़े गोरखधंधे सामने आ रहे हैं।
उन्होंने यह भी माना कि निजी मेडिकल कॉलेजों में भी इस तरह की गड़बड़ी होने की संभावना है। हालांकि इस सारी प्रक्रिया में कहीं न कहीं व्यापम और चिकित्सा शिक्षा विभाग पर भी उंगुली उठ रही है। क्योंकि जब छात्रों को भोपाल में काउंसिलिंग से गुजरना होता है तो फिर वहां से फर्जी छात्र कैसे कॉलेजों तक पहुंचकर प्रवेश ले लेते हैं।
जुलाई में उजागर हुई थी जालसाजी
जुलाई में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों की काउंसिलिंग में रविंद्र और सत्यपाल का प्रवेश फर्जी पाया गया था। फोटो और हस्ताक्षर के आधार पर दोनों की पोल खुली थी। भास्कर ने 12 सितंबर के अंक में इस जालसाजी का खुलासा किया था। वहीं, पिछले महीने हिमाचल प्रदेश की एक छात्रा ने भी कॉलेज के कर्मचारियों पर प्रवेश के नाम पर पांच लाख रुपए मांगने का आरोप लगाया था।
अगले साल बदलेंगे व्यवस्था
आपको नहीं लगता कि मेडिकल कॉलेजों में बड़े पैमाने पर यह गोरखधंधा चल रहा है?
बिल्कुल सही बात है। इसके लिए गिरोह सक्रिय हैं।
प्राइवेट कॉलेजों के लिए आप कैसे मॉनीटरिंग कर रहे हैं?
इस संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है।
भोपाल में काउंसिलिंग में लापरवाही हुई है क्या?
नहीं, हम सिर्फ दस्तावेजों की जांच करते हैं। कम्प्यूटर पर फोटो देखना मुश्किल होता है।
इंदौर में फर्जी छात्रों पर एफआईआर करने में चार महीने लग गए?
पुलिस तफ्तीश के बाद ही कार्रवाई करती है।
आप कैसे इससे निपटेंगे?
अगले साल पीएमटी परीक्षा के पहले विशेष व्यवस्था की जाएगी।(चिकित्सा शिक्षा विभाग के डायरेक्टर डॉ. वी.के. सैनी से सीधी बातचीत)










