छिन सकती है कुर्सी तक
रायपुर. राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव में प्रत्याशियों द्वारा किए जाने वाले खर्च की सीमा बढ़ाने पर विचार कर रहा है। हालांकि खर्च का ब्योरा जमा करने के नियमों में फेरबदल की संभावना नहीं है। वर्तमान नियमों की बात करें तो महापौर को चार लाख रुपए में चुनाव लड़ना होगा। संबंधित पार्टी से प्रत्याशी को मिलने वाला खर्च इस सीमा में शामिल नहीं होगा। इसके बावजूद यह आसान नहीं होगा, क्योंकि राजधानी के 70 वार्ड चार विधानसभा क्षेत्रों में बंटे हुए हैं।
इतने बड़े इलाके का चुनाव केवल चार लाख में लड़ना किसी भी प्रत्याशी के लिए कठिन होगा। निर्वाचन आयोग के अनुसार एक विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी की खर्च सीमा दस लाख है। नगरीय निकायों और पंचायतों के पिछले चुनाव 2004 में हुए थे। तब और अब पांच साल में महंगाई काफी बढ़ गई है। इस वजह से आयोग चुनावी खर्च की सीमा बढ़ाने की सोच रहा है।
आयोग के अधिकारियों ने बताया कि खर्च की सीमा केवल नगर निगमों के महापौर, नगरपालिका अध्यक्षों व नगर पंचायत अध्यक्षों पर ही लागू होती है। पार्षदों व पंच, सरपंचों को इससे मुक्त रखा गया है। सीमा से अधिक खर्च करने पर या खर्च का हिसाब-किताब न देने पर विरोधी प्रत्याशी कोर्ट या आयोग में केस कर सकता है। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर विजयी प्रत्याशी की कुर्सी तक छिन सकती है।
उसे पांच साल तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य करार दिया जा सकता है। प्रत्याशी को जिला निर्वाचन अधिकारी को ही खर्च का ब्योरा देना चाहिए। इसकी समय सीमा चुनाव नतीजों की घोषणा से 30 दिनों के अंदर है। इसी तरह चुनावी खर्च का मीटर प्रत्याशी द्वारा नामांकन भरते ही शुरू हो जाता है। इसमें प्रत्याशी द्वारा भरी गई जमानती राशि, जुलूस, नाश्ते, हार-फूल, बैंड-बाजे सभी का खर्च जुड़ता जाता है।










