‘प्राकृतिक ऊर्जा का उपयोग आवश्यक’
जोधपुर. बढ़ते प्रदूषण और परम्परागत ऊर्जा स्रोतों के बढ़ते दाम से बचने का एक ही उपाय है कि हम प्राकृतिक ऊर्जा का अधिकतम उपयोग करें। सीएसआईआर के पूर्व अध्यक्ष एवं आईआईटी दिल्ली के विभागाध्यक्ष प्रो. एनडी कौशिक ने नेकोर -09 कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को कुड़ी हौद स्थित व्यास इंस्टीट्यूट कैंपस में यह विचार व्यक्त किए।
प्रो. कौशिक ने कहा कि भारत में जोधपुर ही ऐसी जगह है जहां सूर्य का प्रकाश अधिकतम रहता है। इस शहर में सूर्य की ऊर्जा का उपयोग करने के लिए एक संस्थान का निर्माण किया जाना चाहिए। उन्होंने जोधपुर शहर में सोलर हीटर व बिल्डिंग में सोलर आर्किटेक्चर के अधिकतम उपयोग की आवश्यकता प्रतिपादित की।
बीएसआईपी लखनऊ के रजिस्ट्रार और वैज्ञानिक प्रो. एससी वाजपेयी ने भवन ऊर्जा पर चर्चा के दौरान कहा कि आने वाला समय भवन मानकों को तय करने वाला होगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दो वर्षो में एनर्जी कंजर्वेशन एक्ट-2004 लागू हो जाएगा।
लागू होने के बाद बड़े उद्योगों व मल्टी स्टोरी बिल्ंिडग में इसका पालन करना अनिवार्य हो जाएगा। इसकी अनुपालना के लिए ब्यूरो ऑफ एनर्जी स्टडीज ने सर्टिफाइड एनर्जी ऑडिटर्स बनाए हैं। यह ऑडिटर्स भवन में नैसर्गिक ऊर्जा के अधिकतम उपयोग की विवेचना करेंगे।
साथ ही यह देखेंगे कि प्राकृतिक ऊर्जा का पूरा दोहन हो। वाजपेयी ने कहा कि जिस भवन में प्राकृतिक रोशनी नहीं होती उस भवन का डिजाइन फेल माना जाना चाहिए। राष्ट्रीय रसायन प्रयोगशाला पुणो के निदेशक एनएन गुप्ता ने बताया कि रिन्यूएबल हाइड्रोजन बनाने की प्रक्रिया का पुन: निर्धारण करने का समय आ गया हैं। वर्तमान में अपनाई जा रही हाइड्रोजन बनाने की प्रक्रिया में त्रुटि है।
इसलिए अब सेमीकंडक्टर तकनीक पर आधारित हाइड्रोजन का निर्माण करना होगा। कांफ्रेंस में सीएमईआरआई दुर्गापुर के वैज्ञानिक एससी मैथी ने सोलर- ट्री की परिकल्पना बता कर शोधार्थियों को अचम्भित कर दिया। मैथी ने बताया कि जिस प्रकार प्राकृतिक पेड़ों में पत्तियों के माध्यम से हवा का निर्धारण होता है उसी प्रकार सोलर -ट्री में पत्तियों की जगह सेमीकंडक्टर लगाए जाने चाहिए।
यह सौर ऊर्जा को इलेक्ट्रिक ऊर्जा में परिवर्तित करेंगे जिसका उपयोग मानव मात्र के लिए किया जा सकेगा। इस मौके पर राष्ट्रीय भौतिकी प्रयोगशाला, नई दिल्ली के पूर्व डायरेक्टर कृष्णलाल ने शोधार्थियों से मुलाकात कर अपने अनुभव बांटे। वे इस राष्ट्रीय सेमिनार के समापन समारोह में रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र में हो रहे बदलावों की जानकारी देंगे। इस दौरान देश और राज्य के कई वैज्ञानिक, शोधार्थी व विद्यार्थी मौजूद थे।










