स्वास्थ्य संचालक बंदी, मुकदमा दर्ज
रायपुर. स्वास्थ्य विभाग में करोड़ों रुपए के घटिया कलर डॉप्लर, मॉनीटर और माइक्रोस्कोप की सप्लाई मामले में पुलिस ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए डायरेक्टर हेल्थ डॉ. बीएस सार्वा समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया। ये उपकरण 2004 से 2006 के बीच खरीदे गए थे। आज गिरफ्तार किए गए दो अन्य लोगों में तत्कालीन स्वास्थ्य संचालक डॉ. डीके सेन और स्टोर क्लर्क सुंदरलाल पटेल शामिल है।
तीनों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने शुक्रवार शाम डॉ. सार्वा और क्लर्क सुंदरलाल पटेल को न्यायालय में पेश किया था। कोर्ट का समय गुजर जाने की वजह से सुनवाई नहीं हो पाई। अब उन्हें शनिवार को प्रथम अपर सत्र न्यायालय एनके चंद्रवंशी की अदालत में पेश किया जाएगा।
इन उपकरण और यंत्रों की खरीदी के समय डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी राज्य के स्वास्थ्य मंत्री थे। डॉ. सेन हेल्थ के डायरेक्टर और डॉ. सार्वा संचालनालय में संयुक्त संचालक थे। डॉ. सेन ने सार्वा को स्टोर इंचार्ज की जिम्मेदारी सौंपी थी। तीसरा आरोपी पटेल उस समय स्टोर का प्रभारी अधिकारी था। डॉ. सार्वा और डॉ. सेन की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।
खबर लिखे जाने तक उन्हें डीकेएस चौकी में रखा गया था। क्राइम ब्रांच के एडिशन एसपी अजातशत्रु बहादुर सिंह ने बताया कि जांच में तीनों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले हैं। इस प्रकरण में पुलिस ने सुभाष लाल को पुलिस ने इसी साल अगस्त में धमतरी से गिरफ्तार किया था। सुभाष उपकरण सप्लाई करने वाली कंपनी सीजी सर्जिकल फर्म का संचालक है।
नाटकीय गिरफ्तारी
पुलिस तीन-चार दिनों से लगातार डॉ. सार्वा से पूछताछ कर रही थी। उनसे गोलमाल के संबंध में कई तरह दस्तावेज मांगे गए। शुक्रवार सुबह से गोलबाजार पुलिस थाने के टीआई नवनीत पाटिल ने उन्हें बुला लिया था। शाम को अचानक 5 बजे डॉ. सार्वा को गिरफ्तार की सूचना दी गई। वे भौंचक्क रह गए। पटेल को भी बुला लिया गया। देर शाम डॉ. सेन भी पुलिस के घेरे में आ गए। उन्हें एक मामले में अग्रिम जमानत मिल चुकी है।
ये धाराएं लगाईं
धारा 189/07ख, 420, 466, 468, 471, 120बी, 34 आईपीसी, 13/1/डी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 138 नेगोशियेबल इंस्टूमेंट एक्ट।
एक नजर में फर्जीवाड़ा
2004-2006 में सप्लाई किया उपकरण, 10 आईसीसीयू मॉनीटर सप्लाई किए गए, इसके लिए एक करोड़ 88 लाख पेमेंट, 16 कलर डॉप्लर की सप्लाई की गई, इसके लिए दो करोड़ 94 लाख का भुगतान किया, 14 अगस्त को संचालक ने भेद खोला, अक्टूबर में गोलबाजार थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।










