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Saturday, November 07, 2009 05:49 [IST]  

danik bhaskarमामला दबाने हुई थी कोशिश

भास्कर न्यूज

रायपुर. करोड़ों रुपए की कलर डॉप्लर, मानीटर आदि की खरीदी का मामला सप्लाई के कुछ दिनों बाद ही उजागर हो गया था। कई बड़े लोगों के नाम सामने आने के बाद मामले को ही दबाने की कोशिश शुरू हो गई थी। बाद में उच्च स्तर पर शिकायत हुई और इसी दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय में बदलाव हुआ। सचिव बनाए गए विकासशील ने अपने स्तर पर मामले की पड़ताल करने के बाद पूरा मामला पुलिस को सौंप दिया।



स्वास्थ्य विभाग को ब्रांडेड कंपनी का लेबल लगाकर घटिया मशीनें व उपकरण सप्लाई करने का खेल अर्से से चल रहा था। इस रैकेट में महकमें के अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे। सीजी सर्जिकल फर्म ने खुद को जापान की टीवीट्रॉन कंपनी का प्रतिनिधि बताया था। कंपनी के नाम पर सीजी सर्जिकल को मल्टी कलर डॉप्लर और मानीटर सप्लाई करने का ठेका मिला।



तमाम जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सप्लाई किए गए ये उपकरण इतने घटिया थे कि उपयोग के पहले ही खराब हो गए। उनकी क्वालिटी देखकर अफसरों को शक हुआ। गड़बड़ी के खुलासे के बावजूद उस समय मामले को दबा दिया गया। अगस्त में सीजी सर्जिकल के डायरेक्टर सुभाष लाल को पकड़ा। उसके बाद गोलमाल की परतें उधड़ने लगीं।



उसके बाद गोलबाजार पुलिस ने तफ्तीश की दिशा बदली और अनछुए तथ्यों को आधार बनाया। जांच में पुलिस के हाथ कई अहम दस्तावेज लगे। विकासशील को स्वास्थ्य सचिव बनाए जाने के बाद पुलिस को स्वास्थ्य संचालनालय और मंत्रालय से खरीदी संबंधी कई दस्तावेज आसानी से मिल गए।



संचालक डा. सार्वा और पूर्व संचालक डॉ. सेन दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। डॉ. सार्वा के अलावा हेल्थ में अभी दो डायरेक्टर डॉ. प्रमोद सिंह और डॉ. राजमणी हैं। इन तीनों में डा. सार्वा सबसे ज्यादा पावरफुल हैं।



जिम्मेदारी तय होगी : पुलिस विभाग के आला अफसरों ने बताया कि इस मामले की सीबीआई, ईओडब्लू, विधानसभा की समिति और खुद पुलिस ने तीन-चार मर्तबा अलग-अलग स्तर पर जांच की है। इस वजह से कई दस्तावेज अलग-अलग एजेंसी के पास जमा है। उन तमाम दस्तावेजों का एक साथ परीक्षण होगा। उसके बाद अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी कि कौन किस हद तक जिम्मेदार है या नहीं।



ऐसे किया फर्जीवाड़ा



उपकरणों की खरीदी में मुनाफा कमाने के लिए अलग-अलग कंपनियों ने धांधली करने के एक-दूसरे से अलग हथकंडे अपनाए। सीजी सर्जिकल कंपनी को जापान की टीवीट्रॉन कंपनी ने अपना प्रतिनिधि बनाया था। उसी कंपनी के नाम पर सीजी सर्जिकल को मल्टी कलर डॉप्लर और मानीटर सप्लाई करने का ठेका मिला। माइक्रोस्कोप, स्प्रे पंप और ओटी उपकरण अलग-अलग कंपनियों से खरीदे गए।



क्वालिटी खराब होने का मामला खुला तो गुपचुप तरीके से मामले का सेटलमेंट करने की कोशिश की गई। कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर कंपनी के प्रतिनिधि ने रकम लौटाने का नाटक रचा। उसने सहकारी बैंक में खाता खुलवाया और सवा करोड़ का चेक जारी कर दिया। उसके बाद अचानक वह गायब हो गया और बैंक का खाता बंद कर दिया। सीजी सर्जिकल के अलावा मैसर्स मधु इंटरप्राइजेस और मेसर्स इंटेर्क्‍स दलदल सिवनी के खिलाफ मामला कायम है।



अनुमति की जरूरत नहीं-सचिव



अभी पुलिस विभाग से गिरफ्तारी की अधिकृत सूचना नहीं मिली है। इस तरह के मामले में गिरफ्तारी के लिए शासन से अनुमति की जरुरत नहीं है। रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कदम उठाया जाएगा। - विकासशील, सचिव, स्वास्थ्य विभाग



इन बिंदुओं को आधार बनाकर की गिरफ्तारी



क्रय नियमों का पालन नहीं किया जाना पाया, तयशुदा मापदंड से ज्यादा खरीदी कर ली, टेंडर नियमों का उल्लंघन किया गया, डिलीवरी से पहले भुगतान कर दिया

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