कबीर ने शब्दों से दी समाज को दिशा
जोधपुर. शब्दों को हथियार बनाकर उन्होंने कुरीतियों पर कड़े प्रहार किए। वस्तुत: कबीर ने इंसानियत व भाईचारे का संदेश दिया था।
संत शुक्रवार को कबीर आश्रम सालावास में प्रारंभ हुए कबीर पंथ संप्रदाय के महाकुंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कबीर के प्रसिद्ध दोहे—पौथी पढ़ पढ़ जग मुआ, पंडित भया न कोय। ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडत होय..की व्याख्या करते हुए कहा कि प्रेम ही जगत में शास्वत है।
जहां प्रेम नहीं है, वहां कलह, बैर, बदला, क्रोध व ईष्र्या व्याप्त हो जाती है।इस अवसर पर संत हीरादास महाराज ने कहा कि गुरु हमेशा सद्मार्ग बताता है। गुरु का संबंध योग्यता से है। अयोग्य को गुरु मानना मूर्खता है। शिष्य की एकमात्र योग्यता उसका समर्पण है।
समारोह की शुरुआत में सुबह आश्रम के शिखर पर ध्वजारोहण किया गया। बाद में कबीर साहेब व संत यक्ति साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्जवलित किया गया। सुबह आठ बजे शंखनाद के साथ कबीर मूल बीजक पाठ हुआ। सत्संग में श्रद्धालु झूम उठे। शाम को आरती, कबीर चालीसा, कबीर स्तुति, सत्संग, प्रवचन व भजनों के कार्यक्रम हुए। सम्मेलन में राज्य भर से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
महंत अमरसाहेब ने बताया कि शनिवार को संत समागम होगा। इस दौरान सद्गुरु कबीर की शिक्षाओं की प्रासंगिकता विषय पर संगोष्ठी होगी। दोपहर में साधु संत पौधरोपण करेंगे। पूर्णारती सोमवार सुबह होगी। शोभायात्रा भी निकाली जाएगी।










