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Saturday, November 07, 2009 06:21 [IST]  

danik bhaskarजमीन अब मिट्टी के मोल नहीं

भास्कर न्यूज

रायपुर. मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट की बैठक में राज्य की नई औद्योगिक नीति पर मुहर लगाई गई। इसके तहत यह स्पष्ट कर दिया गया है कि उद्योगपति किसानों की जमीन मिट्टी के मोल नहीं खरीद पाएंगे। नई उद्योग नीति में जमीन की न्यूनतम कीमत भी तय कर दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने पत्रकारों को बताया कि नई नीति के तहत जिस मुरूम वाली जमीन की कीमत 50 हजार रुपए प्रति एकड़ थी, उसके लिए कम से कम पांच लाख रुपए एकड़ देना होगा।



असिंचित जमीन जिसके लिए 75 हजार रुपए एकड़ कीमत निर्धारित थी, उसके लिए 7 लाख 50 हजार रुपए की दर से भुगतान करना होगा। इसी प्रकार सिंचित जमीन की कीमत एक लाख रुपए से बढाकर न्यूनतम 10 लाख रुपए एकड़ कर दी गई है। डॉ. सिंह ने उम्मीद जताई कि जमीन की अच्छी कीमत मिलने पर जगह-जगह होने वाले विरोध प्रदर्शन में कमी आएगी। 1 नवंबर 2009 से 2014 तक प्रभावशील रहने वाली उद्योग नीति में कोर सेक्टर से फोकस हटाकर लघु उद्योगों पर केंद्रित कर दिया गया है।



इसके तहत सभी वृहद औद्योगिक क्षेत्रों में कम से कम 20 प्रतिशत जमीन लघु उद्योगों के लिए छोड़ी जाएगी। सरकार का ध्यान अब लघु उद्योगों को अधिक से अधिक फायदा दिलाने की होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोर सेक्टर के स्टील, सीमेंट, ऊर्जा और एल्युमिनियम के उद्योग तो खनिज पदार्र्थो की वजह से राज्य में आएंगे ही। इस कारण अब लघु उद्योगों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।



कोर सेक्टर के उद्योगों को अब केवल स्टांप शुल्क में छूट का ही फायदा मिलेगा। नई उद्योग नीति के तहत अब जिले को यूनिट नहीं माना जाएगा बल्कि विकासखंड यूनिट होगा। यूनिट को आधार बनाकर औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। इससे पिछड़े क्षेत्रों के विकासखंडों में भी समान रूप से विकास होने की संभावना है।



निजी क्षेत्र के औद्योगिक क्षेत्र



सरकार ने कम से कम 75 एकड़ क्षेत्र में औद्योगिक अधोसंरचना के विकास की योजना भी बनाई है। इससे औद्योगिक क्षेत्र के विकास में निजी क्षेत्र की भी भूमिका सुनिश्चित हो सकेगी।



कोर सेक्टर से हटाए गए उद्योग



कोर सेक्टर में अब केवल सीमेंट, स्टील, ऊर्जा और एल्युमिनियम के संयंत्र होंगे। इसमें पहले से शामिल उद्योगों को हटा लिया गया है। उन्हें अब विशेष छूट नहीं मिलेंगी। जिन उद्योगों को निगेटिव लिस्ट में डाला गया है वे हैं- क्रशर, लाइम स्टोन, समस्त खनिज पदार्र्थो के उद्योग, पालीथीन, एल्कोहल, स्पंज आयरन, मिनी स्टील, राइस मिल, पटाखा, आरा मिल।



अन्य प्रमुख बातें



संयंत्र, खान और रेलवे स्टेशन के बीच कामन रेल कारीडोर विकसित किया जाएगा, औद्योगिक क्षेत्रों में सिक्स लेन सड़क मार्ग, वाटर सप्लाई के लिए एनीकट का निर्माण किया जाएगा, निर्यात को बढ़ावा देने के लिए निर्यात सूचना केंद्र स्थापित किए जाएंगे, 100 प्रतिशत विदेशी निवेश पर पांच प्रतिशत अधिक अनुदान दिया जाएगा, एससी, एसटी वर्ग के उद्यमियों के लिए उन्नयन योजना होगी, विकलांग, नक्सल हिंसा से पीड़ित लोगों को 10 प्रतिशत अधिक सुविधा दी जाएगी, कोर सेक्टर के बड़े उद्योगों को तकनीकी दक्षता बढ़ाने के लिए इंस्टीट्यूशन लगाने होंगे, मेटल, हर्बल, प्लास्टिक, जेम एंड ज्वेलरी, एल्युमिनियम पार्क विकसित किए जाएंगे, प्रदूषण फैलाने वाले किसी भी संयंत्र को अब शासकीय सुविधाएं नहीं।



भू भाटक खत्म मिलेगा हक



रायपुर विकास प्राधिकरण व हाउसिंग बोर्ड के भूखंड और मकान लेने वाले हितग्राहियों को लगने वाला भू भाटक समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में इस पर सैद्धांतिक निर्णय ले लिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने बताया कि 30 साल के लीज पर दिए जाने वाले भूखंड और मकानों का मालिकाना हक लोगों को दे दिया जाएगा।



इसके एवज में 99 साल के लिए एकमुश्त राशि देकर भूखंड या मकान फ्री होल्ड कर दिया जाएगा। इसके नियम आदि तय करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है। आवास एवं पर्यावरण मंत्री राजेश मूणत ने दिल्ली में लिए गए फैसले की कापी लेकर उसे राज्य में लागू करने की योजना तैयार की, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।



इस व्यवस्था के लागू हो जाने से लोगों को संपत्तिकर और भू भाटक के दोहरे करारोपण से फायदा मिलेगा। इस निर्णय से रायपुर विकास प्राधिकरण के करीब 10 हजार और हाउसिंग बोर्ड के इतने ही उपभोक्ताओं को सीधा लाभ होगा।

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