फ्रीशिप कोटे की धज्जियां
नई दिल्ली. सरकारी भूमि पर चल रहे पब्लिक स्कूलों में गरीब परिवारों के बच्चों के लिए लागू 15 फीसदी के फ्रीशिप कोटा राजधानी के स्कूल किस तरह से लागू कर रहे हैं, इसकी पोल शिक्षा निदेशालय ने खोलकर रख दी है। निदेशालय की मानें तो राजधानी के 384 स्कूलों में से 245 स्कूलों ने इस कोटे को पूरी तरह से लागू किया है, जबकि 139 स्कूलों ने इसे लागू नहीं किया।
कोटा लागू करने वाले स्कूलों में जहां बाल भारती पब्लिक स्कूल, सर गंगाराम अस्पताल मार्ग, कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी सरीखे स्कूल हैं, वहीं इसे लागू न करने वालों में भारतीय विद्या भवन, रामजस व संस्कृति स्कूल के नाम प्रमुख हैं। निदेशालय की ओर से जारी जानकारी में साफ तौर पर स्पष्ट किया गया है कि पब्लिक स्कूलों में कितनी सीटांे पर कितने गरीब परिवारों के बच्चों को दाखिला दिया है और कितना फीसदी फ्रीशिप कोटा लागू किया गया है।
निदेशालय ने यह तो स्पष्ट किया है कि कहां कोटा लागू हुआ है और कहां नहीं, लेकिन यह साफ नहीं किया कि ऐसा न करने वाले स्कूलों पर क्या कार्रवाई होगी। इस बाबत निदेशालय के एक आला अधिकारी का कहना है कि कार्रवाई की प्रक्रिया काफी जटिल है। स्कूल हमेशा अफने बचाव में जवाब देते हैं कि बच्चे आएंगे ही नहीं तो दाखिला कहां से दें। अधिकारी ने बताया कि बस ऐसी ही परेशानियों के चलते कोटा लागू न करने वाले सैकड़ों स्कूल कार्रवाई के दायरे से बाहर हो जाते हैं।
इस विषय में जब स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में काम करे रहे संगठन सोशल ज्यूरिस्ट के प्रमुख अशोक अग्रवाल से पूछा गया तो उनका कहना था कि जब तक मामले में शिक्षा निदेशालय कड़ा रुख नहीं अपनाएगा, तब तक हालातों में सुधार की बात करना ही गलत है। उन्होंने कहा कि सरकार की शह पर ही यह स्कूल लगातार सरकारी भूमि पर जमे हुए हैं और उसके एवज में गरीब बच्चों को शिक्षा देने से बच रहे हैं।










