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Saturday, November 07, 2009 06:44 [IST]  

danik bhaskarमतदाता शनिवार को प्रतिनिधि चुनेंगे

भास्कर न्यूज

भिलाई. मतदान की घड़ी निकट आते ही जहां प्रत्याशियों की धड़कनें तेज हो गई हैं वहीं मतदाता भी अपने लोकतांत्रिक कर्तव्य का निर्वहन करने बेताब हैं। प्रचार थमने के बाद चिंतन के लिए मिले 36 घंटे में उन्होंने सोच भी लिया कि किसे मतदान करना है।



पखवाड़े भर वे नेताओं की सुनते रहे। वही कसमें, वही वादे, आरोप-प्रत्यारोप और सबकी एक से बढ़कर एक दावे से मतदाता ऊब चुके थे। चुनावी कोलाहल थमने से लोगों ने आज सुकून महसूस किया। नेताओं के दावों और वादों पर गौर फरमाया और तय किया कि कौन उनके लिए सबसे उपयुक्त प्रतिनिधि होंगे। वे शनिवार को अपनी उंगली की ताकत दिखाएंगे। इधर प्रत्याशी आज अंतिम दौर तक मतदाताओं से संपर्क साधते रहे। उन्होंने समर्थकों की टोली के साथ डोर-टू- डोर संपर्क किया।



इस उपचुनाव में 15 प्रत्याशी मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस के बीच ही है। हर चौक चौराहों, नुक्कड़, ठेले, होटलों, दफतरों व अन्य सार्वजनिक स्थानों में कयासों का दौर चल रहा है। जितने लोग उतनी तरह की बातें हो रही हैं। किसी एक हिस्से के मतदाताओं के रूझान से पूरे विधानसभा क्षेत्र का आंकलन करना मुश्किल है।



पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में क्षेत्र के मतदाताओं ने भाजपा के सरोज पांडेय को सिर आंखों पर बिठाया था। सरोज ने 63224 वोट पाकर रिकार्ड लगभग 22 हजार मतों से जीत दर्ज की थी। वही सरोज कुछ महीने बाद जब लोकसभा चुनाव के लिए दोबारा वोट मांगने गई तो 23952 उनके प्रशंसकों ने साथ छोड़ दिया। सरोज को मात्र 39272 वोट ही मिले।



भाजपा को झटका लगा, लेकिन इसका फायदा कांग्रेस को भी नहीं मिला। उसके भी 17769 वोट कम हो गए। विधानसभा चुनाव में जहां बृजमोहन सिंह को 43137 वोट मिले थे, लोकसभा चुनाव में प्रदीप चौबे को मात्र 25369 वोट मिले। उस समय छत्तीसगढ़ स्वाभिमन मंच के कथित स्थानीयता के मुद्दे की ऐसी हवा चली कि दोनों राष्ट्रीय पार्टियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा।



इस बार मंच उतना प्रभावी नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में 34 हजार मतदाता जो मंच के साथ थे उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है कि वे आखिर किसका साथ देंगे। यह तो 10 नवंबर को पता चलेगा कि कितनी उंगलियों ने किसके पक्ष में बटन दबाया और किसको ठेंगा दिखाया। फिलहाल इस चुनाव में मुख्यमंत्री डा रमन सिंह की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। जिस तरह उन्होंने स्वयं को प्रत्याशी बताते हुए वैशाली नगर की जनता से वोट मांगा, अपनी सरकार के कामकाज दुहाई दी और यहां तक कहना पड़ा कि जागेश्वर को जिताएं फिर क्षेत्र के विकास की जवाबदारी उनकी है। दूसरी तरफ कांग्रेस में दिग्गजों के जमावड़े ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है।

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