फॉरेन फैकल्टी पर तेवर कड़े
नई दिल्ली. विदेशी शिक्षण संस्थानों से संबंधित विधेयक को संसद में पेश करने की तैयारी में जुटी केंद्र सरकार का फॉरेन फैकल्टी के मसले पर सख्त रुख बना हुआ है। ब्रिटिश हाई कमिश्नर ने सरकार की इस सख्ती को ब्रिटेन के भारत स्थित स्कूल के लिए बड़ी मुश्किल बताते हुए रियायत देने की मांग की है।
हालांकि मानव संसाधन मंत्रालय के उच्च अधिकारियों के साथ हाई कमिश्नर रिचर्ड स्टाग की कई दौर की बातचीत के बावजूद केंद्र ने अपने पुराने नियमों में बदलाव से मना कर दिया है।
गौरतलब है कि निमयों के तहत विदेशों के जो स्कूल भारत में स्थित हैं उन्हें दस प्रतिशत से ज्यादा फॉरेन फैकल्टी नियुक्तकरने की अनुमति नहीं है। दिल्ली में एक ब्रिटिश स्कूल है, जिसे लेकर ब्रिटेन उच्चयोग की ओर से लगातार दबाव बनाने की कोशिश होती रही है। ब्रिटिश हाई कमिश्नर ने मानव संसाधन मंत्रालय की स्कूली शिक्षा सचिव अंशू वैस को लिखे पत्र में कहा है कि दस प्रतिशत विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की पांबदी के चलते ब्रिटिश स्कूल को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार इस सीमा को समाप्त करने के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की है।
मानव संसाधन मंत्रालय के अधिकारियों ने उच्च स्तरीय विचार विमर्श के बाद ब्रिटिश उच्चयोग को अपने पुराने रुख में बदलाव न कर पाने की मजबूरी से अवगत करा दिया है। मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि फॉरेन यूनिवर्सिटी बिल के मूर्त रूप लेने के बाद भी भारत में फॉरेन फैकल्टी को लेकर बेहद लचीलेपन का फिलहाल कोई संकेत नहीं है।
हालांकि अपनी हाल की अमेरिका यात्रा से लौटे मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल विदेशी शिक्षण संस्थानों को लेकर बेहद उत्साहित हैं। लेकिन उन्होंने भी स्पष्ट कहा है कि भारत में आने वाले संस्थानों को मनमानी की इजाजत नहीं होगी। कोई भी संस्थान यहां लाभ के उद्देश्य से नहीं आ सकता है।










