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Saturday, November 07, 2009 06:52 [IST]  

danik bhaskarनिगम चुनाव की तैयारी में भाजपा पीछे

भास्कर न्यूज

रायगढ़. आसन्न नगर निगम चुनाव में महापौर प्रत्याशी को लेकर भाजपा में एकमतेन की स्थिति नहीं लग रही। बल्कि कांग्रेस में महापौर प्रत्याशी को विधायक सहित वरिष्ठ नेताओं की लगभग आम सहमति मिलने के संकेत हैं।



बिखराव की स्थिति से गुजर रही केंद्रीय भाजपा की रायगढ़ नगर व जिला में भी कुछ यही परिस्थितियां सामने आ रहीं है। पिछले दिनों नगरीय निकाय चुनाव को लेकर बनाई गई चयन समिति में ही नगर व जिला भाजपा दो खेमे में बंट गई। स्थानीय नेताओं ने इस चयन समिति का ही पुरजोर विरोध करते हुए इसे अमान्य करार दे दिया। ऐसी स्थिति में एकता व अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाली भाजपा अपने ही घर में अलग-थलग नजर आ रही है।



आने वाले दिसंबर-जनवरी माह में नगर निगम के चुनाव होने हैं। एक तरफ कांग्रेस से महापौर की एक पारी खेल चुके जेठूराम मनहर का नाम दुबारा सामने आ रहा है। श्री मनहर, डा. शक्राजीत नायक व पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के समर्थन का दावा कर रहे हैं। हालांकि, पिछले निगम चुनाव का माहौल इस बार बनता नहीं दिख रहा है।



महापौर के खिलाफ भाजपा, निर्दलीय सहित उनके ही पार्टी के कुछ पार्षद लामबंद होने लगे हैं। महापौर के लिए प्रमुख रुप से शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष खुशीराम मल्होत्रा भी जोर-आजमाईश में लगे हैं। इन सबके बावजूद वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में जेठूराम मनहर दावेदारी की दौड़ में आगे नजर आ रहे हैं। इधर, सत्ता की दूसरी पारी खेल रही भाजपा में महापौर प्रत्याशी को लेकर अभी तक किसी एक नाम का खुलासा नहीं किया गया है।



भाजपा की ओर से महावीर चौहान, महेंद्र चौहथा, सीताराम जाटवर, सावन कुमार, राजेंद्र कछवाहा का नाम सामने आ रहा है। महावीर गुरुजी को हाल ही में पार्टी ने निलंबन से बहाल किया है। गुरुजी इस प्रत्याशा में हैं कि पार्टी उन्हें महापौर के लिए मौका दे सकती है। लेकिन, पूर्व निगम चुनाव में बागी होने के साथ बीते विधानसभा चुनाव में निर्दलीय तौर पर भाग्य आजमाने वाले गुरुजी को टिकट देने के पक्ष में पूर्व विधायक विजय अग्रवाल फिलहाल नहीं दिखते।



जैसा कि उन्होंने पूर्व में ही एक बयान जारी कर स्पष्ट कर दिया था कि पार्टी विरोधी गतिविधियों से जुड़े कथित मीर जाफर व जयचंदों को किसी भी सूरत में टिकट देने का वे पुरजोर विरोध करेंगे। इस लिहाज से गुरुजी का नाम खटाई में पड़ता दिख रहा है। हालांकि, टिकट की दौड़ में शामिल अन्य चेहरे भी किसी न किसी गुट विशेष से ताल्लुक रखते हुए अपने आला नेताओं की मान-मनौव्वल में भिड़े हैं।



अमर पर रहेगा सारा दारोमदार



भाजपा के सामने ऐसे संशयपूर्ण हालात कभी पैदा नहीं हुए, जैसा आज है। पहले किसी गुट से जुड़े नेता की बात हो या फिर अंतर्कलह का नजारा, सर्वमान्य नेता स्व: लखीराम अग्रवाल ही एक निर्णय लेते थे और इसका सभी को अक्षरश: पालन करना पड़ता था। मौजूदा सियासी परिदृश्य के लिहाज से स्थानीय नेता कई गुटों में बंटे हुए हैं। ऐसे में जिले के प्रभारी मंत्री अमर अग्रवाल को ही महापौर जैसे महत्वपूर्ण प्रत्याशी का नाम तय करने का दारोमदार बनता दिख रहा है।



भरोसेमंद राजनीतिक सूत्रों की मानें तो महापौर प्रत्याशी का नाम ऐन चुनाव के कुछ ही दिन पहले तय किए जा सकते हैं और प्रदेश संगठन का इस बात पर पूरा जोर रहेगा कि विभिन्न गुटों में बंटे नेता एक जुट होकर पार्टी से तय किए गए एक सर्वमान्य नाम पर ही अपनी उर्जा खपाते हुए हर हाल में भाजपा से ही महापौर को निगम में स्थापित करने कार्य करेंगे।



पार्षद चयन में कांग्रेस आगे



पार्षट के चयन में भी कांग्रेस भाजपा से बहुत आगे निकलती नजर रही है। कुल 40 वार्डो में से कांग्रेस के 15 से 20 नाम तो तय बताए जा रहे हैं। वहीं भाजपा प्रत्याशी चयन के लिए बनाई गई पर्यवेक्षकों की सूची में ही उलझ कर रह गई है। ऐसे में अगर निगम चुनाव की स्थिति देखें तो हर हाल में कांग्रेस भाजपा से आगे नजर आ रही है।

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