सागौन तस्करों को लेकर भिड़ गए पुलिसवाले
बिलासपुर. रेलवे पुलिस यात्रियों की जान-माल की सुरक्षा के बजाय सागौन की तस्करी में मशगूल है। इसका खुलासा शुक्रवार को उस समय हुआ जब आरपीएफ के उप निरीक्षक ने जीआरपी की कार्रवाई में बाधा डालते हुए लकड़ी तस्करों को भागने में मदद की। इतना ही नहीं, उप निरीक्षक ने जीआरपी को यार्ड में नहीं आने की धमकी तक दे डाली।
घटना शुक्रवार की सुबह 10:30 बजे की है। हरिद्वार-पुरी उत्कल एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय पर बिलासपुर आने वाली थी। इधर जीआरपी को मुखबिरों से उत्कल एक्सप्रेस में सागौन की तस्करी की सूचना मिली। इसी आधार पर जीआरपी के एएस आई रामनाथ मनहरे सहित जवान विजय त्रिपाठी, कृपाशंकर उपाध्याय और दल सिंह ठाकुर यार्ड पर घेराबंदी करने पहुंच गए।
उत्कल एक्सप्रेस यार्ड में जैसे ही रुकी कुछ लोग ट्रेन से सागौन के सिलपट गिराने लगे। जीआरपी के जवानों ने कीमती लकड़ी के सौदागरों को पकड़ा। इसी बीच आरपीएफ के उप निरीक्षक केबी तिवारी मौके पर पहुंच गए। जीआरपी के अनुसार उप निरीक्षक श्री तिवारी ने तस्करों को छोड़ने की बात कही।
इंकार करने पर वे नाराज हो गए और बहस करने लगे। जीआरपी की टीम ने उप निरीक्षक श्री तिवारी पर यार्ड में नहीं आने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है। उप निरीक्षक पर बातों में उलझाकर लकड़ी के सौदागरों को भागने में सहयोग करने का भी आरोप लगाया गया है। जीआरपी की टीम ने बताया कि यार्ड में लगभग 50 नग सिलपट की जब्ती बनाई जा रही थी।
लेकिन उप निरीक्षक ने दूसरी बार विरोध किया और आधी लकड़ी को आरपीएफ थाने भिजवा दिया। आरपीएफ उप निरीक्षक के रवैये से जीआरपी के जवानों में भारी आक्रोश रहा और आरपीएफ-जीआरपी के बीच तना-तनी की स्थिति बनी रही। आला अधिकारियों के पहल से मामला शांत हुआ। इधर, जीआरपी ने अपने हिस्से के 14 नग सिलपट को वन विभाग के हवाले कर दिया है, वहीं सागौन के 30 नग से ज्यादा सिलपट आरपीएफ थाने में रखा हुआ है। इस संदर्भ में उप निरीक्षक श्री तिवारी से बात की गई, लेकिन उन्होंने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।










