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Saturday, November 07, 2009 07:42 [IST]  

danik bhaskarएसएचओ समेत सात बने आरोपी

राजेश स्वामी

हिसार. बहुचर्चित बालक कांड में नया मोड़ आया है। अब पुलिस कर्मचारियों पर हत्या का नहीं बल्कि गैर इरादतन हत्या का केस चलेगा। तफ्तीश में कांड के छह अन्य आरोपी केस से मुक्त हो गए हैं, जबकि 7 पुलिसकर्मियों पर अब केस चलेगा। यह खुलासा अदालत में पुलिस के चालान पेश करने से हुआ है।



गांव बालक के कृष्ण की पुलिस हिरासत में मौत के मामले में दाखिल चालान में पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) हटाकर 304 (गैर इरादत्तन हत्या) लगाई है। पुलिस ने बरवाला के तात्कालीन एसएचओ व सीआईए के तत्कालीन इंचार्ज समेत सात पुलिस कर्मियों को आरोपी बनाया है।



इस बारे में पुलिस ने अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अंशु शुक्ला की अदालत में चालान पेश किया है। चालान में बरवाला थाना के तत्कालीन एसएचओ बाबूराम, एएसआई रघुबीर सिंह और सीआईए के तत्कालीन इंचार्ज इंस्पेक्टर(अब डीएसपी) बलबीर सिंह, ईएएसआई ओमप्रकाश, रतन सिंह व शमशेर सिंह और सिपाही जसपाल को धारा 304 का आरोपी बनाया है।



इसके अलावा गांव बालक के सत्यवान, बिजेंद्र, श्रीगोपाल, जयपाल, रामफल और धारा को पुलिस ने केस से मुक्त कर दिया है। यह बदलाव डीएसपी इंद्र सिंह कुंडु की जांच रिपोर्ट के आधार पर हुआ है। जांच में गांव बालक के छह ग्रामीणों पर दोष साबित नहीं हुआ। यहां उल्लेखनीय है कि कृष्ण की पुलिस हिरासत में मौत के बाद दो तरह की जांच हुई थी। एक जांच मजिस्ट्रेट से कराई गई थी जबकि दूसरी जांच डीएसपी इंद्रसिंह कुंडू ने की।



पांच आरोपी गिरफ्त से बाहर



बालक हत्याकांड के पांच आरोपी अभी भी पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं। इस मामले में बरवाला थाना के तत्कालीन एसएचओ बाबूराम और एएसआई रघुबीर सिंह गिरफ्तार हो चुके हैं। ये दोनों जेल में बंद हैं। इसके अलावा सीआईए के तत्कालीन इंचार्ज बलबीर सिंह, ईएएसआई ओमप्रकाश, रतन सिंह व शमशेर सिंह और सिपाही जसपाल की अभी गिरफ्तारी नहीं हुई है। ये पांचों तब सीआईए में तैनात थे। अदालत ने पांचों को 12 नवंबर को अदालत में तलब होने का नोटिस जारी किया है।



भेदभावपूर्ण तफ्तीश की : बामल



शिकायतकर्ता पक्ष के वकील वीएस बामल ने कहा कि पुलिस ने केस की तफ्तीश में भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया है। पुलिस को कोर्ट में लितानी निवासी कुलदीप के सामने सीआईए वालों की शिनाख्त परेड करानी चाहिए थी, क्योंकि वह कृष्ण की मौत के समय उसके साथ सीआईए थाने में बंद था।



पुलिस ने आरोपी पुलिस कर्मियों को लाभ देने की मंशा से शिनाख्त परेड नहीं कराई। पुलिस आम लोगों को केस दर्ज होने पर गिरफ्तार कर लेती है, लेकिन इस मामले आरोपियों को फायदा देने के लिए पुलिस ने जांच में ढिलाई बरती।



क्या था मामला



30 जुलाई को गांव बालक निवासी कृष्ण की सीआईए हिसार थाने में पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। पुलिस ने कृष्ण और उसके मामा कुलदीप को अपहरण के एक मामले में गिरफ्तार किया था। गांव बालक का जिले सिंह रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हो गया था।



जिस पर उसके परिजनों ने कृष्ण व कुलदीप पर केस दर्ज कराया था। पुलिस ने मामा-भांजा को पकड़ने के बाद सीआईए थाने लाई थी, जहां कृष्ण की मौत हो गई थी। पुलिस मृतक को सामान्य अस्पताल में लावारिस छोड़कर गायब हो गई थी। इस मामले में ग्रामीणों ने आंदोलन भी किया था।

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