युवा पत्रकारों से मिलकर खुश हुए थे प्रभाष जोशी
रतलाम. हिंदी पत्रकारिता की महान हस्ती प्रभाष जोशी का रतलाम से वैसे तो कोई नाता नहीं रहा लेकिन वे पांच साल पहले यहां व्याख्यान में आए थे। व्याख्यान का आयोजन साप्ताहिक समाचार-पत्र उपग्रह द्वारा आयोजित किया गया था। इसमें श्री जोशी ने कहा था कि पत्रकारिता में हर पत्रकार को अपना जमीर जिंदा रखना चाहिए। व्याख्यान के बाद शहर के कई पत्रकार उनसे मिले थे। पत्रकारों के साथ उन्होंने काफी देर तक चर्चा की थी।
इस दौरान मौजूद कुछ युवा पत्रकारों को देख वे काफी खुशी हुए थे और पत्रकारिता के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा था कि युवा पत्रकारों से देश को बहुत उम्मीदें है। साहित्यकार प्रो. प्रदीपसिंह राव ने बताया व्याख्यान में श्री जोशी ने पत्रकारिता पर चर्चा करते हुए सीख दी थी कि सत्य का अन्वेसन करना चाहिए। अपने काम के प्रति हमेशा सजग रहना चाहिए और पत्रकार को कान व आंख हमेशा खुली रखना चाहिए।
निर्भिक पत्रकारिता की क्षति- मध्यप्रदेश लेखक संघ की रतलाम इकाई के पदाधिकारियों व सदस्यों ने प्रभाष जोशी को श्रद्धांजलि अर्पित की। श्याम पंड्या, अंसार अनंत, नलिन खोईवाल, आशीष दशोत्तर ने बताया श्री जोशी के निधन से निष्पक्ष एवं निर्भिक पत्रकारिता के क्षेत्र की अपूरणीय क्षति हुई है। वे मालवांचल से लेकर दिल्ली तक समान प्रभाव से अपना लेखन कर्म निभाते रहे। उनके नहीं रहने से विशेषकर मालवांचल एक सुयोग्य सक्षम पत्रकार की निष्पक्ष सेवा से वंचित रह गया।
श्रमजीवी पत्रकार संघ के शरद जोशी, पत्रकार प्रकाश उपाध्याय, राजेश जैन ने श्री जोशी के निधन पर शोक सवंदेना व्यक्त की। श्री जोशी ने बताया प्रभाषजी हर क्षेत्र में अपना दखल रखते थे। समस्याओं, अव्यवस्थाओं पर उनकी कलम हमेशा सक्रिय रही। लेखक व कवि अलीक ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा हिंदी पत्रकारिता को श्री जोशी ने लोक मंगल की सर्जनात्मक कामना एवं परिवर्तन के संभाव्य से जोड़कर नई ऊंचाइयां दी।










