रतलामी मटर पर मौसम का ब्रेक
रतलाम. महाराष्ट्र व गुजरात के विभिन्न शहरों को सैकड़ों क्विंटल मटर प्रतिदिन खिलाने वाला रतलाम जिला इन दिनों मौसम की मार के कारण
शिमला, देहरादून व बड़ौदा में उत्पादित मटर खाने को मजबूर है। मटर की फसल को ठंड की जरूरत होती है लेकिन मौसम अभी गर्म बना हुआ है। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से जिले में मटर की अच्छी आवक शुरू हो जाती है लेकिन इस साल अभी तक मटर की आवक एक-दो बोरी हो रही है।
किसानों के अनुसार जिले में 100 से 150 हेक्टेयर में मटर का उत्पादन होता है। मटर की बोवनी सितंबर के दूसरे व तीसरे सप्ताह में कर दी जाती है। 45 से 50 दिन में फसल बाजार में बिकने आ जाती है। मटर की फसल को पानी और ठंडे मौसम की जरूरत होती है लेकिन इस साल औसत से 19 प्रतिशत बारिश कम हुई है और नवंबर शुरू होने के बाद भी तापमान ज्यादा नहीं गिरा है।
धूप में भी तेजी होने से मौसम गर्म बना हुआ है। इस कारण उत्पादन प्रभावित हो रहा है। रतलाम में मटर की मांग होने से व्यापारी बाहर से मंगा रहे हैं। बड़ौदा, शिमला, जयपुर व देहरादून से मात्र एक-दो क्विंटल ही मटर आ रही है। वहीं रतलाम जिले में उत्पादित 50 से 100 किलो मटर की ही आवक हो रही है।
आवक कमजोर होने से कीमतें ज्यादा है। जिले में मटर का भारी उत्पादन होने से सीजन में 500 से 100 बोरी प्रतिदिन मुंबई, अहमदाबाद, नड़ियाद व अन्य शहरों में भेजी जाती है। उत्पादन प्रभावित होने से मटर बाहर नहीं भेजी जा रही है।
क्या कहते है व्यापारी
व्यापारी राकेशकुमार जैन ने बताया मौसम में ठंडक नहीं आने और बारिश कम होने से मटर के उत्पादन में विलंब हो रहा है। शुक्रवार को समीपस्थ ग्राम आलनिया के किसान रतनलाल ही 50 किलो मटर लाए थे जो 101 रुपए किलो बिकी। नगर में बड़ौदा, शिमला, देहरादून से मटर मंगवाई जा रही है।
व्यापारी इकबाल भाई ने बताया आवक बहुत कम हो रही है। सीजन में रतलाम से मुंबई व अन्य शहरों को भारी मात्रा में प्रतिदिन मटर भेजी जाती है। मौसम में ठंडक आ रही है और तापमान में गिरावट हुई तो एक सप्ताह बाद जिले में मटर की आवक जोरदार होने की उम्मीद है।
मौसम के साथ बिजली कटौती का भी असर
पिपलौदी खेड़ी के किसान छोटूलाल पाटीदार ने बताया मटर पर मौसम के साथ बिजली कटौती की भी मार पड़ रही है। मटर मूलत: ठंड की फसल है लेकिन मौसम गर्म बना हुआ है जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है। घंटों हो रही कटौती से सिंचाई भी नहीं कर पा रहे हैं। एक बीघा की फसल में 3 से 4 दिन में 7 से 8 घंटे पानी देना पड़ता है लेकिन इन दिनों दो घंटे बिजली भी नहीं मिल रही है।
120 रु. किलो बिकी
दो-तीन दिनों से बाहर की मटर की आवक भी कम हो रही है। इस कारण भावों में तेजी आ गई है। चार दिन पहले थोक में जहां 60 से 70 रुपए किलो मटर बिक रही थी वहीं शुक्रवार को 80 से 90 रुपए किलो बिकी। फुटकर में चार दिन पहले 80 से 90 रुपए भाव थे तो शुक्रवार दोपहर में 120 तथा शाम को 90 रुपए किलो भाव रहे।










