हाईकोर्ट ने पकड़ा बड़ा जमीन घोटाला
जबलपुर. युगलपीठ ने यह निर्देश जितेन्द्र सिंह की उस जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद दिए, जिसमें शंकरशाह नगर में स्थित 3 करोड़ रुपए की कीमत वाली सरकारी जमीन बेचे जाने का आरोप है। याचिका के अनुसार रामपुर में रहने वाले अशोक उरमलिया ने अधिकारियों से मिलीभगत करके न सिर्फ सरकारी दस्तावेजों में छेड़छाड़ की, बल्कि अवैध ढंग से प्राइम लोकेशन में स्थित 30 हजार वर्गफुट जमीन अपने नाम पर ट्रांसफर करा ली।
इस मामले पर हाईकोर्ट ने पूर्व में विवादित जमीन से संबंधित खसरों का मूल रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए थे। आज सुनवाई के दौरान तहसीलदार पीएस त्रिपाठी और पटवारी नंदलाल कोर्ट में हाजिर हुए। उन्होंने वर्ष 1975-76 और वर्ष 1979-80 के खसरे का मूल रिकॉर्ड पेश किया। रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद युगलपीठ ने पाया कि विवादित जमीन के खसरे के रिकॉर्ड में एक पर्ची लगाकर उसमें शंकर सिंह आत्मज राम सिंह का नाम लिखा गया है।
तहसीलदार द्वारा पेश किए गए वर्ष 1963-64 के रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद युगलपीठ ने पाया कि विवादित जमीन पर सरकार की मिल्कियत थी। युगलपीठ ने पाया कि खसरे के रिकॉर्ड में जिस स्थान पर सरकारी जमीन लिखा था, वहां पर सफेदा (इंक रिमूवर) लगाकर शंकर सिंह का नाम दर्ज किया गया। इसके बाद विवादित जमीन के खसरे के रिकॉर्ड में मालिकाना हक अशोक उरमलिया का लिख दिया गया।
सुनवाई के दौरान तहसीलदार कोर्ट को यह नहीं बता सके कि सरकारी रिकॉर्ड में कैसे शंकर सिंह का नाम दर्ज हो गया। इस पर युगलपीठ ने दो टूक कहा कि सरकारी जमीन को हड़पने के उद्देश्य से ही खसरे के रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की गई और यह एक बहुत बड़ा जमीन घोटाला है। अदालत ने तमाम रिकॉर्डो को जब्त करने के निर्देश दिए, ताकि कल कोई अधिकारी यह बहाना न बना सके कि रास्ते में संबंधित रिकॉर्ड खो गए हैं।
युगलपीठ ने कहा कि यदि जिला कलेक्टर उक्त रिकॉर्ड को देखना चाहते हैं, तो वे हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से संपर्क कर सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई 30 नवम्बर को निर्धारित करते हुए युगलपीठ ने कोर्ट में मौजूद तहसीलदार को कहा कि वे वर्ष 1965 से 1974-75 तक के खसरे के गुमे हुए रिकॉर्ड और खतौनी हर हाल में पेश करें।
इसके अलावा कोर्ट ने अशोक उरमलिया और शंकर सिंह को बाद में नोटिस जारी करने की मंशा जताई। युगलपीठ ने अपनी राय देकर कहा कि यह एक ऐसा मामला है, जिसमें कलेक्टर द्वारा दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराना चाहिए, ताकि खसरे में गड़बड़ी करने वाले तमाम लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सके। आवेदक की ओर से अधिवक्ता शशांक शेखर ने पैरवी की।










