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Saturday, November 07, 2009 12:08 [IST]  

danik bhaskarएच1एन1 के निगेटिव टेस्ट के पीछे फ्लू का नया वायरस!

सुमित्रा देव राय

मुंबई। एच1एन1 से अलग कोई नया फ्लू वायरस तो अपने पैर नहीं पसार रहा है! कई मरीजों में स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण होने के बावजूद टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आने से इस चर्चा को तेजी मिली है।



जहां कुछ लोग निगेटिव रिपोर्ट को टेस्टिंग की गुणवत्ता और घटिया स्तर से जोड़ रहे हैं तो कुछ का मानना है कि यह एच1एन1 से अलग किसी अन्य वायरस का संक्रमण हो सकता है। पुणो के ससून अस्पताल के एक विश्लेषक के मुताबिक, एच1एन1 इनफ्लुएंजा से मरने वाले 30 से 35 फीसदी मरीजों ने वैसे तो इस वायरस से मिलते-जुलते लक्षण दिखाए, लेकिन इनकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। कई प्रमुख अस्पतालों के निदेशक संजय ओक ने बताया कि बृहन मुंबई म्युनिसिपल कापरेरेशन ने भी इस बारे में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी को लिखा है। ओक ने बताया, ‘हाल में नायर अस्पताल में दो ऐसे मरीजों की मौत हुई जिनमें लक्षण तो एच1एन1 जैसे थे, लेकिन टेस्ट निगेटिव आया।’



पुणो स्थित बीजे मेडिकल कॉलेज के डीन अरुण जामकर भी इसकी पुष्टि करते हैं। उन्होंने बताया ‘ससून अस्पताल में मारे गए 36 मरीजों में एच1एन1 के लक्षण पाए गए थे। टेमीफ्लू का इन पर असर भी दिखा लेकिन इनका टेस्ट निगेटिव आया। वैसे, सैंपल एकत्र करने अथवा टेस्ट के स्तर पर खामी भी इसका कारण हो सकती है।’



यूं होता है टेस्ट: टेस्ट प्रोटोकाल के तहत मरीज के लार के सैंपल को लेकर इसे वायरल ट्रांसपोर्ट मीडियम (वीएमटी) में विकसित होने दिया जाता है। सैंपल का मीडियम दोषपूर्ण होने की स्थिति में टेस्ट का परिणाम भी गलत होता है। पुणो की प्रयोगशालाओं में वीएमटी की आपूर्ति एनआईवी द्वारा चयनित सप्लायर करते हैं। एनआईवी प्रशासन इस बारे में टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं हो सका।



बैठक में हुई चर्चा: डायरेक्टरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (डीएमईआर) के संयुक्त संचालक प्रवीण शिंगारे ने स्वीकार किया कि राज्य की उच्च स्तरीय बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। कई मामलों में सैंपल को गलती से निगेटिव या पॉजीटिव मानना इसका कारण हो सकता है। आपूर्तिकर्ताओं द्वारा खराब गुणवत्ता की वीएमटी की सप्लाई भी रिपोर्ट के परिणाम को प्रभावित कर सकती है।



संभव है कि वायरस एच1एन1 न होकर सीजनल हो। दोनों वायरस के लगभग एक जैसे लक्षण होते हैं। मुंबई में एच1एन1 के सैंपल्स में से 20 फीसदी में सीजनल फ्लू और 25 फीसदी में स्वाइन फ्लू पॉजिटिव पाया गया था।’ -अभय चौधरी, हाफकिन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक

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