यूरोपीय संघ के साथ एटमी करार
नई दिल्ली। देश ने शुक्रवार को यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ एटमी ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग के करार पर दस्तखत किए। इससे फ्यूजन एनर्जी टेक्नोलॉजी से सस्ती बिजली बनाने के लिए मिलकर शोध करने का रास्ता खुल गया है। दोनों पक्ष वैश्विक आतंकवाद से निपटने के लिए यूरोपोल व भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच एक समझौते को जल्द ही आकार देने पर भी सहमत हो गए। इसी तरह मुक्त व्यापार समझौैते (एफटीए) को भी एक साल के भीतर अंतिम रूप देने पर सहमति जताई गई।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और ईयू के वर्तमान अध्यक्ष स्वीडन के प्रधानमंत्री फ्रेड्रिक रैनफेल्ट व यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष जोस मैन्यूएल बारोसो की मौजूदगी में यूरोपीय एटामिक एनर्जी कम्युनिटी व परमाणु ऊर्जा विभाग के बीच शुक्रवार को यह एटमी करार हुआ।
आतंकवाद पर समझौता शीघ्र : बाद में एक संयुक्त प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बताया कि यूरोपोल व भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच आतंकवाद से मुकाबले के लिए एक समझौते को शीघ्र अंतिम रूप दे दिया जाएगा। शिखर बैठक में तीनों नेताओं ने पाकिस्तान व अफगानिस्तान की स्थिति की समीक्षा की।
‘पाक में स्थिरता हमारे हित में’ : मनमोहन सिंह ने प्रेस वार्ता में विदेशी मेहमानों की मौजूदगी में कहा कि पाकिस्तान व अफगानिस्तान की घटनाएं किसी अन्य देश की बजाय भारत को सर्वाधिक प्रभावित करती हैं और इन दोनों देशों में शांति व स्थिरता में ही उसका हित है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा कि वह इन दोनों देशों में शांति व स्थिरता के अपने प्रयासों पर कायम रहे।
व्यापार समझौते पर चर्चा : शिखर वार्ता में दोनों पक्षों के बीच व्यापक आधार वाले व्यापार व निवेश समझौते में आ रही कठिनाइयों पर भी चर्चा हुई और संकल्प जताया गया कि एक साल के भीतर समझौता आकार ले लेगा। दोनों पक्षों के बीच पर्यावरण समझौता, आर्थिक संकट व अन्य वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
क्या है फ्यूजन एनर्जी?
परमाणु बिजलीघरों में आमतौर पर यूरेनियम जैसी धातुओं के बड़े परमाणुओं को तोड़ा जाता है, जिससे बड़े पैमाने पर ऊर्जा निकलती है। हालांकि यह तरीका बहुत महंगा और पर्यावरण की दृष्टि से हानिकारक है, क्योंकि ऐसे बिजलीघर विकिरण छोड़ने वाला कचरा पैदा करते हैं। फ्यूजन टेक्नोलॉजी में दो हल्के पदार्थो के परमाणु का योग कराकर एक भारी परमाणु बनाया जाता है और इस प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकलती है। सूर्य में इसी प्रक्रिया से ऊर्जा बनती है। इस टेक्नोलॉजी के विकास के लिए इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लीयर एक्सपेरीमेंट रिएक्टर (आईटीईआर) प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इसमें भारत, चीन, ईयू व अमेरिका सहित सात देश भाग ले रहे हैं।










