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Sunday, November 08, 2009 00:43 [IST]  

danik bhaskarनतीजों के बाद दिखेगा तल्खी का असर

विनोद भावुक

शिमला. उपचुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा से लेकर मतदान तक कांग्रेस -भाजपा दोनों दलों के नेताओं के सुरों की तल्खी की तपिश का असर चुनावी नतीजों के आने के बाद सामने आएगा।



चुनावी नतीजे बेशक कुछ भी रहें यह तय है कि ज्वाली में भाजपा का घमासान और रोहड़ू में कांग्रेस का बवाल आने वाले दिनों में दोनों दलों की अंदरूनी लड़ाई को बेपर्दा करने वाला है। दोनों दलों के अंदर ध्रुवीकरण के संकेत चुनावी दिनों में और साफ दिखाई दिए हैं, ऐसे में जाहिर है कि आने वाले दिनों में दोनों दलों की अंतर्कलह खुल कर सामने आने वाली है।



यह भी तय है कि प्रदेश में होने वाली हलचल की गूंज दिल्ली दरबार तक सुनाई देगी। जीत का श्रेय खुद लेने और हार का ठीकरा दूसरे के सिर फोड़ने की रणनीति मतदान खत्म होने के साथ ही शुरू हो चुकी है। दोनों दलों के अंदर शह और मात का शुरू हुआ खेल आलाकमान तक भी जरूर पहुंचेगा। चुप्पी सिर्फ तब तक की है जब तक नतीजे सामने न आ जाएं।



दो दिग्गजों की पत्नियों के तय माने जा रहे टिकट कटने से शुरू हुआ राजनीतिक ड्रामे का असर चुनाव प्रचार के आखिरी पलों तक भाजपा दिग्गज राजन सुशांत और कांग्रेस दिग्गज वीरभद्र सिंह के तेवरों से साफ झलकता रहा। वीरभद्र सिंह ने अपनों पर तंज कसे तो राजन सुशांत ने भी नजला अपने ही कुनबे पर गिराया।



दोनों दलों के नेताओं के बिगड़े हुए सुर आने वाले दिनों में दोनों ही दलों की अंदरूनी राजनीति में भयंकर फूट की ओर इशारा कर रहे हैं। ऐसे में अप्रत्याशित चुनावी नतीजे इस आग में घी का काम करेंगे। बहरहाल यह उपचुनाव इसलिए भी याद रखा जाएगा कि विरोधी पार्टी को घेरने के बजाय दोनों दलों में आपसी घेराबंदी की कसरत ज्यादा रही। राजनीति विश्लेषकों के अनुसार दोनों दलों में खेमों की पुरानी राजनीति दबी जरूर हो, लेकिन खत्म नहीं हुई है।

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