निरस्त की गई निविदा को फिर निकाला
अजमेर. राज्य में अकाल और आर्थिक मंदी को देखते हुए नगर सुधार न्यास ने जवाहर रंगमंच का सौंदर्यीकरण कराने के लिए निरस्त की गई निविदा एक बार फिर जारी कर दी है। खास बात ये है कि प्रदेश की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। इसके अलावा न्यास को निविदा निरस्त करने के फैसले से हजारों रुपए का नुकसान अलग उठाना पड़ा है।
न्यास ने करीब एक माह पहले जवाहर रंगमंच के सौंदर्यीकरण कराने के निविदा जारी की थी। इस कार्य पर करीब 75 लाख रुपए खर्च होना है। निगम ने निविदा जमा होने के दिन अचानक निरस्त कर दी। इसकी वजह मुख्यमंत्री के उस आदेश का हवाला दिया गया था, जिसमें ने प्रदेश में अकाल और आर्थिक मंदी को देखते हुए सरकारी कार्यालयों के सौंदर्यीकरण सहित अन्य मदों पर खर्चा नहीं करने की नसीहत दी गई।
यूआईटी ने आनन फानन में निविदा निरस्त कर दी थी। न्यास ने एक माह बाद ही सौंदर्यीकरण कराने के लिए निविदा जारी कर दी। निविदा दस नवंबर को जमा होगी। दिलचस्प बात यह है कि प्रदेश के हालत में कोई बदलाव नहीं आया है और न ही मुख्यमंत्री ने अपने आदेशों को वापस लिया है। मुख्यमंत्री के आदेश न्यास पर लागू नहीं होते थे तो फिर क्यों निविदा निरस्त की गई। और यदि आदेश लागू होते हंै तो फिर क्यों निरस्त की गई निविदा निकाली गई। इसका यूआईटी अफसरों के पास कोई जवाब नहीं है। इसके अलावा न्यास ने निविदा निकालने के लिए प्रचार पर दस बीस हजार रुपए खर्च कर दिए जो व्यर्थ गए।










