जाति तो पूछो सिपाही की
अजमेर. पुलिस के सिपाही अब तक बेल्ट नंबर से ही जाने जाते हैं लेकिन अब शायद वे जाति से भी पहचाने जाएंगे। तबादलों की अर्जी के लिए जारी परिपत्र में पुलिसकर्मियों से अब जाति भी पूछी गई। कांस्टेबलों ने जाति बता तो दी लेकिन वे इस बात पर हैरान हैं कि आखिर जाति पूछी क्यों जा रही है?
एसपी हरि प्रसाद शर्मा ने 2 सितंबर 2009 को एक परिपत्र जारी किया। क्रमांक था 11270—93. यह परिपत्र उन कांस्टेबलों आदि के लिए था जो दो वर्ष से अधिक समय से एक ही थाने, चौकी आदि पर तैनात थे, और स्वेच्छा से किसी और जगह स्थानांतरण चाहते थे।
एस पी ने इसमें पांच सूचनाएं मांगी। पहली, मौजूदा पदस्थापन किस तारीख से है। दूसरी, गृह थाना मय जिला। तीसरी, जिस नए स्थान पर तैनाती चाहते हैं, उनके नाम वरीयता के आधार पर। चौथी, नियुक्ति की दिनांक। पांचवीं, सूचना चौंकाने वाली रही। इसमें एसपी ने जाति पूछी है। ऐसा पुलिस में पहली बार हुआ है जब कांस्टेबलों से जाति भी पूछी गई।
सामान्यत: पुलिस में बेल्ट नंबर ही कांस्टेबलों की पहचान होता है। यही कांस्टेबल का नाम, जाति, धर्म सब कुछ माना जाता है। कांस्टेबल अपनी पुलिस की नौकरी में जितने भी पत्र व्यवहार आदि करता है उसमें नाम और बेल्ट नंबर ही लिखता रहा है। पहली बार जाति भी बतानी पड़ी है।
सबकुछ जानकारी पहले से है तो सही : एसपी ने जाति क्यों पूछी, इसे लेकर कांस्टेबलों में हैरानी है। खास कर इसलिए कि एसपी कार्यालय में एसपी से लेकर कांस्टेबल तक का सभी व्यक्तिगत विवरण मौजूद है। भर्ती प्रक्रिया में जाति पूछी जाती है, इसके पीछे मुख्य कारण आरक्षण का होता है। जाति प्रमाण पत्र भी मांगा जाता है ताकि आरक्षण के तहत नियुक्ति, बाद में पदोन्नति आदि की प्रक्रिया का आधार रहे।










