मदद की आस में दंगा पीड़ितों के परिवार
अम्बाला. 1984 के जिन दंगा पीड़ित परिवारों के लिए पंजाब में लगातार धरने-प्रदर्शन किए जा रहे हैं ऐसे ही लगभग एक दर्जन परिवार अम्बाला में भी बसे हुए हैं। इन परिवारों को आज तक सरकारी मदद की आस है।
कई परिवारों को तो मदद का आश्वासन केंद्र सरकार तक से मिला, मगर राज्य सरकार का रुख अब तक उदासीन बना हुआ है। इन परिवारों को आज भी मदद की आस है। हालांकि केंद्र सरकार ने दंगा पीड़ितों के लिए राशि भी जारी की है, मगर अम्बाला में बसे इन परिवारों को अब तक कुछ भी हासिल नहीं हो पाया है।
1984 में भड़के दंगों के दौरान सदर बाजार और राय मार्केट में सिख दुकानदारों को खूब नुकसान झेलना पड़ा था। राय मार्केट में बब्बर रेडिया के संचालक नवनीत सिंह बताते हैं कि दंगों के समय शरारती लोगों ने उनकी दुकान में आग लगा दी थी। इससे लाखों का सामान जलकर खाक हो गया था।
वह बताते हैं कि सुबह शहर में कर्फ्यू लगा होने के कारण वह दुकान पर देरी से पहुंचे थे। उन्होंने बताया फायर ब्रिगेड ने अपनी रिपोर्ट में दुकान जली होने की जानकारी दी थी जबकि थाने में भी उन्होंने एफआईआर उस समय दर्ज कराई थी।
नवनीत ने बताया कि मुआवजे की मांग लेकर वह जिला प्रशासन से लेकर केंद्र सरकार तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक किसी भी तरह की सरकार मदद उनतक नहीं पहुंची है। उन्होंने बताया कुछ समय पहले केंद्र सरकार से जारी एक पत्र उन्हें मिला था जिसमें मदद देने का आश्वासन दिया गया था।
मगर अब तक यह मदद उन्हें नहीं मिली। नवनीत ने बताया कि उनकी तरह राय मार्केट और सदर बाजार में लगभग एक दर्जन सिख दुकानदार है जिन्हें उस समय नुकसान झेलना पड़ा था, मगर मदद अब तक नसीब नहीं हुआ। नवनीत सिंह के अलावा सदर बाजार में बीएस बिंद्रा की दुकान को भी शरारती तत्वों ने आग के हवाले कर दिया था।
बीएस बिंद्रा ने कहा कि प्रदेश सरकार की नाकामी के वजह से अब तक उन्हें मुआवजा नहीं मिल सका है जबकि नुकसान की रिपोर्ट सदर थाने में दर्ज कराई गई थी। उन्होंने बताया इस हादसे के बाद उनके पिता जी की तबीयत तक खराब हो गई थी। वह बताते हैं कि मुआवजे के केवल आश्वासन ही मिले हैं।
714.76 करोड़ जारी हुए थे
लगभग दो-तीन वर्ष पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दंगा पीड़ितों के घावों पर मरहम लगाते हुए 714.76 करोड़ रुपए सहायता राशि जारी की थी। मृतकों के आश्रितों को 3.5 लाख, घायल हुए लोगों को 1.25 लाख जबकि दुकानों व मकानों के नुकसान का अनुमान लगाकर राशि वितरित की जानी थी। पंजाब व कुछ अन्य राज्यों में यह राशि तो जारी हुई, परंतु प्रदेश सरकार के ढुलमुल रवैये के कारण अम्बाला में बसे परिवारों को मुआवजे की राशि अब तक नहीं मिल सकी।










