Danik Bhaskar Logo
| 42 Editions | 10 States

Sunday, November 08, 2009 01:35 [IST]  

danik bhaskarजलने वाली पराली ‘भाव’ से जला रही है पशुपालकों को!

भास्कर न्यूज

sरामसिंहपुर. धान की कटाई के बाद जला देने वाली पराली की इन दिनों डिमांड बढ़ गई है। हालांकि आपूर्ति मांग के अनुरूप नहीं हो रही है, जिसके चलते यह अच्छे दाम पर बिक रही है। चूंकि इसकी बिकवाली के मुख्य कारण सिर्फ आपूर्ति कम होना नहीं, बल्कि हरे चारे और तूड़ी के भाव बढ़ना भी माना जा रहा है।



इसके चलते सैकडों वाहन नहरी क्षेत्र से पराली दूर-दराज के क्षेत्रों में पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। जानकारों की मानें तो धान की कटाई और पिटाई के बाद शेष बचे पराली रूपी सूखी घास को कभी किसान जला दिया करते थे, लेकिन 150 से 200 रुपए प्रति क्विंटल बिकने वाली तूड़ी के भाव इन दिनों 550 से 600 रुपए प्रति क्विंटल पहुंचने के चलते पराली की अच्छी खासी डिमांड हो गई है।



ऐसे में यह प्रति बीघा 800 से 1000 रुपए बिक रही है। हालांकि पशु पराली कम खाते हैं, लेकिन हरे चारे व तूड़ी के भाव सातवें आसमान पर पहुंचते से इसकी खरीद कर पाने में असमर्थ पशुपालक पराली खरीदने को विवश हैं। इतना ही नहीं खल सहित पशुओं के दूसरे आहार के भाव सातवें आसमान पर होने के कारण लोग पराली का जमकर स्टॉक कर रहे हंै।



ऐसे में पराली को किसान आय का बड़ा जरिया भी मानने लगे हैं। उधर, गांव 64 जीबी के जसवंत सिंह, 62 जीबी के स्वर्ण सिंह व 465 आरडी के हंसराज गोदारा ने बताया कि सड़क किनारे फैंकने या जलाने की अपेक्षा पराली आय का माध्यम बन गई है। तूड़ी की जगह पराली की खरीद ज्यादा होने के कारण इसके अच्छे दाम मिल रहे हैं।

  share
apne vichaar
post a comment
name:
email:
website:
code:
 
select your language:
Hindi Roman Hindi Phonetic English
comment: