पैन नहीं हथियार मांग रही रुकसाना
अम्बाला. आठ लाख के इनामी आतंकवादी को उसी की एके-47 राइफल से मौत के घाट उतारने वाली रूकसाना कोसर की रगों में आतंकवादियों को ठिकाने लगाने के आज भी खून खौल रहा है। बेशक उसे जम्मू कश्मीर सरकार ने एसपीओ की नौकरी दी है।
लेकिन वह इस पैन चलाने वाली नौकरी की बजाए हाथों में एके-47 राइफल की मांग कर रही है। वह चाहती है कि उसे किसी कुर्सी पर बैठने की बजाए पहाड़ों व मैदानों में आतंकवादियों को मारना ज्यादा पसंद कर रही है। यही कारण है कि उसने एसपीओ की नौकरी करने से स्पष्ट इंकार कर दिया है।
इस अबला ने अपने कोमल हाथों में हथियार पकड़ने के लिए जो नौकरी मांगी है सरकार भी उसकी इस सोच को मानने के लिए मजबूर हो गई है। रूकसाना अपने भाई आजाद अहमद, पिता नूर अहमद तथा माता रशिदा बेगम के साथ आल इंडिया एंटी टेरोरिस्ट फ्रंट के प्रदेश उपाध्यक्ष नितिन उप्पल के निवास पर शुक्रवार देर रात पहुंची थी।
रूकसाना के बुलंद हौसलों को देखकर कोई भी अबला उसकी कायल हुए बिना नहीं रह सकती। रूकसाना भी खूंखार आतंकवादी अब्बू ओबामा को मारने के बाद स्वयं पर गर्व महसूस करती है कि उसने एक देशद्रोही तथा लगभग 150 लोगों की जान लेने वाले को अपने ही हाथों मारा है।
उसे 27 सितंबर की वह रात आज भी याद है, लेकिन वह इस रात से घबराती नहीं, बल्कि सीना चौड़ा कर उसे याद करती है। किस प्रकार अब्बू तथा उसके साथी जिला राजौरी के शहादरा शरीफ गांव स्थित उनके घर में पनाह लेने के लिए घुसे थे, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि यह उनका आखिरी मुकाम है।










