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Sunday, November 08, 2009 01:55 [IST]  

danik bhaskarसपनों पर रजिस्ट्री की ब्रेक

संदीप शर्मा.

ambalaअम्बाला. अम्बाला सिटी के नीलकमल ने बलदेव नगर के नजदीक वर्ष 2006 में प्लाट खरीदा था। सोचा था आशियाना बनाएगा। प्लाट की पूरी कीमत भी चुका दी मगर रजिस्ट्रियां बंद होने की वजह से प्लाट उसके नाम नहीं हो सका। अब वो मकान बनाना चाहता है मगर क्या करे।



प्लाट उसके नाम नहीं, दावे के नाम पर उसके पास फुल पेमेंट की रसीद है मगर रेवन्यू रिकार्ड में इसकी अहमियत नहीं। रजिस्टरी नहीं तो बैंक से लोन नहीं मिल सकता। लोन नहीं हो तो मकान बनाने का सपना कैसा साकार होगा। उससे भी बड़ी दिक्कत यह है कि वह इस प्लाट को बेच भी नहीं पा रहा है।



अकेला नीलकमल ऐसी समस्या नहीं झेल रहा है बल्कि ट्विन सिटी में ऐसे हजारों लोग हैं, किसी का मकान बनाने का सपना अधर में है, तो किसी घर में शादी-ब्याह का काम अटका है तो कोई महंगा उपचार या ऑपरेशन करवाने से वंचित है। बहुतों ने इस आस में प्रापर्टी में निवेश किया था कि आड़े वक्त में काम आएगा मगर अब फंस गए हैं।



एकता विहार में रह रहे पंजाब बिजली बोर्ड के रिटायर्ड एडीशनल एसई अवतार सिंह 68 वर्ष के हो चुके हैं। अवतार सिंह बताते हैं कि उनकी रिटायरमेंट का पैसा प्रापर्टी में फंस गया है। सोनिया कांप्लेक्स व गणोश विहार में प्लाट लिए। उनकी पूरी कीमत भी चुका दी मगर रजिस्टरी नहीं हुई। जिंदगी का क्या भरोसा, कल क्या हो जाए, फिर सारी उम्र की इस कमाई का क्या होगा?



चुनाव के दौरान नेताओं ने किए थे वायदे



छह महीने पहले लोकसभा चुनावों के दौरान गांधीग्राउंड में हुई रैली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के समक्ष कुमारी शैलजा ने अम्बाला में रजिस्ट्रियां न होने से जनता को हो रही परेशानी से इत्तेफाक जताया था। साथ ही वायदा किया था कि यदि सांसद बनीं तो राज्य सरकार से मिलकर इस परेशानी को दूर करेंगी।



वहीं पिछले महीने विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री की रैली में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी दोबारा सरकार बनने पर रजिस्ट्रियां खोलने की वायदा किया था। अब लोग यही सोच रहे थे कि क्या वो वायदे चुनावी लॉलीपॉप तो नहीं थे?



बेच देंगे प्लाट



टेलीफोन डिपार्टमेंट से सेवानिवृत महेशनगर निवासी टेक सिंह (67) की भी ऐसी ही समस्या है। रिटायरमेंट के पैसे से वर्ष 2006 में दलीपगढ़ में प्लाट खरीदा। पूरी पेमेंट भी चुका दी मगर पिछले साढ़े तीन साल से रजिस्टरी खुलने का इंतजार है। सोचा था जरूरत पड़ने पर यह प्लाट बेच देंगे।



दोनों तरफ से फसें



व्यापारी भारत भूषण ने सदर बाजार में बेटे की दुकान खरीदने के लिए दो साल पहले वशिष्ठ नगर में अपने प्लाट का सौदा किया था। सौदे में जो एडवांस राशि मिली थी वही देकर सदर बाजार में एक दुकान का बयाना दिया था। अब दोनों तरफ फंस गए हैं। एक तरफ प्लाट खरीदने वाली पार्टी रजिस्टरी होने तक पूरी पेमेंट नहीं देगी वहीं सदर बाजार की दुकान का सौदा भी अधर में है।

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