पानी को ‘जहर’ बनाती खस्ताहाल पाइपें
जालंधर. जालंधर के वरियाणा पिंड और लुधियाना के बुड्ढा नाला के आस-पास कालोनियों में 100 से 150 फुट तक पानी पीने लायक नहीं रह गया है। सैंट्रल ग्राऊंड वाटर लेबल बोर्ड की हिदायत पर पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) के मेंबर सैक्रेटरी ने जालंधर के बस्ती बावा खेल और वरियाणा गांव के आसपास और लुधियाना में ग्राउंड वाटर की जांच के बाद रिपोर्ट में कहा कि पानी में हैवी मैटेल्स, साइनाइड़, एल्कलाइन, कैडमियम, लेड और क्रोमियम के तत्व घुल रहे हैं, जो धीरे-धीरे पेयजल का विषैला बनाने का काम कर रहे हैं।
रिपोर्ट के बाद भी भूजल स्तर को ठीक करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहे। उधर, नगर निगम भी पीने के पानी को लेकर गंभीर नहीं दिख रहा। स्वच्छ पेयजल के नाम पर हर साल 17 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन लोगों के घरों में दूषित पेयजल की आपूर्ति की जा रही है।
यही नहीं, इतनी बड़ी रकम खर्च करके भी नगर निगम बरसों पुरानी पेयजल आपूर्ति की पाइपों को बदल नहीं पा रहा है। शहर के कई मोहल्लों में बरसों पुरानी पेयजल आपूर्ति की पाइपों के कारण बीमारी फैल सकती है। जंग लगे पाइपों में लीकेज के कारण लोगों के घरों में गंदा पानी पहुंच रहा है।
संवेदनशील इलाके : पिछले साल रामामंडी, गढ़ा, बस्तियात इलाके, बशीरपुरा, आबादपुरा, एकता नगर, गांधी कैंप, किशनपुरा, भार्गव कैंप आदि इलाकों में दूषित पानी पीने से कई लोग बीमार हो गए थे। इस बार शुरुआत गढ़ा में 33 लोगों के बीमार होने से हुई है।
20 साल पुरानी पाइप लाइनें : शहर में फैली 1000 किलोमीटर वाटर सप्लाई की लाइनों में से ज्यादातर 20 साल पुरानी हैं, जबकि शेष को समय व जरूरत के अनुसार बिछाया गया है। इन पाइप लाइनों से प्रतिदिन 300 एमएलडी पानी की सप्लाई की जा रही है। अहम बात तो यह है कि पुरानी पाइप लाइनों में जंग लगने के कारण लीकेज आ गए हैं। अगर समय रहते लीकेज पाइपों को बदला नहीं गया तो शहरवासी गैस्ट्रो के अलावा कई गंभीर बीमारी के मकड़जाल में एक बार फिर से फंस जाएंगे।
इन इलाकों में हैं पुरानी पाइपें : बस्तियात इलाकों व छोटे मोहल्लों, गुरुनानकपुरा, एकता नगर, कमल विहार, किशनपुरा, संतोखपुरा, काजी मंडी, दादा कालोनी, गढ़ा, भार्गव कैंप, आबादपुरा, गांधी कैंप, राम नगर, बूटा मंडी, बूटा पिंड, बस्ती शेख।
पेयजल सप्लाई में खर्चा
पेयजल सप्लाई में पंजाब वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड के माध्यम से साल 2007-08 में 374.86 लाख, साल 2008-09 में 350 लाख रुपए खर्च किए गए, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 400 लाख रुपए खर्च करने के प्रस्ताव पास किया गया है।
म्यूनिसिपल फंड के माध्यम से साल 2007-08 में 184.76 लाख, साल 2008-09 में 300 लाख रुपए खर्च किए गए। चालू वित्तीय वर्ष में 350 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। आपरेशन एंड मैंटीनेंस पर साल 2007-08 में 266.78 लाख रुपए, साल 2008-09 में 250 लाख रुपए खर्च हो गए। चालू वर्ष में 350 लाख रुपए खर्च करने की योजना है।










