जयपुर में बना था वाटर स्टीम प्लांट
जयपुर. जयपुर में बाहर से पानी लाने का इतिहास बरसों पुराना है। पहले पानीपेच से नहर के जरिए पानी परकोटे में लाया गया, उसके बाद 40 किलोमीटर दूर रामगढ़ बांध से पानी लाकर जयपुर के लोगों की प्यास बुझाई गई। अब जब रामगढ़ बांध सूख गया तो 106 किलोमीटर दूर बीसलपुर बांध से पानी परकोटे में पहुंचाया गया है।
पानी की अचानक कमी होने का इतिहास भी पुराना है। वर्ष 1880 में जब अचानक दो साल तक बारिश नहीं हुई तो पानी की कमी को देखते हुए पानीपेच पर राज्य का पहला वाटर स्टीम प्लांट लगाया गया था और नहर के द्वारा पानी परकोटे में पहुंचाया गया।
ऐसा था पानी का पुराना सिस्टम
परकोटे में पानी की कमी होने पर जयपुर के तत्कालीन शासक रामसिंह द्वितीय ने 1879 में प्रोजेक्ट बनवाया तथा पानीपेच अमानीशाह नाले के पास 16 कुएं बनाए गए, वहीं नाले में स्टीम वाटर प्लांट बनाया गया। इस प्लांट के लिए 1890 में लंदन से 20 फीट चौड़ी तथा 30 फीट ऊंचाई वाली मशीन मंगवाई गई। इसे पानीपेच के नजदीक नाले में लगाया गया।
16 कुएं चालीस फुट नीचे से एक नहर से आपस में जोड़े गए और उसी नहर से पानी पचास फुट नीचे नाले में लगे स्टीम वाटर प्लांट में पहुंचता था। कोयले से चलने वाले इस प्लांट से पानी बड़ी तेजी से पचास फुट ऊपर आता था। कुएं कभी सूखें नहीं, इसके लिए कुओं के नजदीक वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया गया जो अब भी काम करता है। वर्तमान में भी ये कुएं जलदाय विभाग की पानी सप्लाई को बढ़ाने के काम आ रहे हैं।
नहर के रूप में पहुंचता था परकोटे में पानी
पानी का पुराना सिस्टम किसी मनोरम दृश्य से कम नहीं था। पांच फुट चौड़ी नहर चांदपोल गेट के एक दरवाजे से पुराने जयपुर में प्रवेश करती थी। यहां से छोट़ी, बड़ी चौपड़ व रामगंज चौपड़ तक जाती थी। चौपड़ पानी के होद थे। परकोटे के बीच के रास्ते पर बने छोटे मंदिर उस समय नहर के बीच में बने थे। पानी इनके चारों तरफ का चक्कर लगाकर आगे बढ़ता था। यही पानी जयपुर के लोगों की प्यास बुझाता था।
अब भी सुरक्षित है मशीन
पानीपेच के नाले में अब भी यह मशीन सुरक्षित है। पुराने वाटर स्टीम प्लांट का काफी हिस्सा खत्म हो गया है, लेकिन मशीन को तीन मंजिल के एक मकान में सुरक्षित रखा गया है। करीब 119 साल बाद भी इस मशीन के कहीं जंग नहीं लगा है। बताया जाता है कि जब यहां भी पानी की कमी हुई तो इसी मशीन का छोटा सिस्टम यहां लगाया गया।










