दबाव डालकर लिए ड्राइवर के बयान
चंडीगढ़. ‘प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के दौरे के समय सुरक्षा प्रबंधों के चलते पीजीआई में सुमित प्रकाश वर्मा की मौत से हुई बदनामी पर परदा डालने की कोशिश शुरू हो गई है। शुक्रवार को चंडीगढ़ पुलिस और इंटेलीजेंस ब्यूरो ने टैक्सी ड्राइवर बिल्ला पर दबाव डालकर बयान लिए हैं।’
यह आरोप सुमित के भतीजे धीरज वर्मा ने लगाए हैं। धीरज का कहना है कि पुलिस अपनी लापरवाही छिपाने के लिए क्लीनचिट हासिल करने का प्रयास कर रही है। धीरज ने कहा कि शुक्रवार को इंटेलीजेंस ब्यूरो और चंडीगढ़ पुलिस ने उनसे इंद्रजीत अस्पताल से पीजीआई ले जाने वाले ड्राइवर का फोन नंबर लिया।
आईबी और पुलिस कर्मचारी बिल्ला को उन जगहों पर ले गए, जहां से वह गाड़ी लेकर आया था। धीरज ने कहा कि अब पुलिस पूरा रूट तय करने के बाद दावा कर रही है कि सिर्फ 25 मिनट में ही दूरी तय कर ली गई, जबकि असलियत उससे अलग है। पुलिस बिल्ला को उसकी इंडिका कार में ले जाने के बजाय लग्जरी कार मंे लेकर गई।
कार के आगे पुलिस की जिप्सी लगी रही, ताकि सड़क पर उन्हें तुरंत पास मिल सके। 15 मिनट का वह वक्त भी नहीं गिना गया, जब प्रधानमंत्री के निकलने के दौरान ट्रैफिक रोका गया था। इमरजेंसी के अंदर जाने के लिए पीजीआई सिक्योरिटी व पुलिस से मिन्नतें करने में जो वक्त बर्बाद हुआ, उसका भी कोई हिसाब नहीं है। धीरज का कहना है कि जांच उन्हें इंसाफ दिलाने के लिए नहीं, बल्कि इसलिए हो रही है ताकि चंडीगढ़ प्रशासन खुद को इस मामले में पाक साफ साबित कर सके। डीएसपी जगबीर सिंह के मुताबिक अभी तक की जांच में किसी सरकारी कर्मी की कोई लापरवाही सामने नहीं आई है।










