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Sunday, November 08, 2009 05:45 [IST]  

danik bhaskarकिरण समेत कई नेता रह गए

प्रमोद वशिष्ठ

aचंडीगढ़. हरियाणा के कई दिग्गजों जैसे किरण चौधरी, रघुबीर कादियान, सावित्री जिंदल, विनोद शर्मा, संपत सिह, बलबीर पाल शाह, कुलदीप शर्मा और राव इंद्रजीत के भाई यादवेन्द्र सिंह को पहले चरण में कैबिनेट में जगह नहीं मिल पाई।



इनमें से किरण चौधरी और सावित्री जिंदल तो शपथ ग्रहण समारोह में भी नहीं आई थीं। संपर्क किए जाने पर किरण बोलीं, ‘यह सीएम का विशेषाधिकार है कि वह किसे मंत्री बनाएं और किसे नहीं। मैं सोनिया गांधी के नेतृत्व में पार्टी के लिए समर्पित होकर काम करती रहूंगी।’



एक सवाल पर किरण ने कहा कि उनकी नेता सोनिया गांधी हैं और वह इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहतीं। हां, उन्होंने कार्यकर्ताओं से चुनौतियों का सामना करने की अपील करते हुए कांग्रेस के लिए काम करने को जरूर कहा।



विधानसभा चुनाव से पहले इनेलो छोड़कर कांग्रेस में आने वाले संपत सिह ने कहा कि वे तो कांग्रेस में सेवा करने आए हैं। जैसा काम मिलेगा, कर लेंगे। मंत्री बनाएंगे तो बन जाएंगे वरना पार्टी के साथ रहकर जनसेवा करेंगे।



मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने कहा कि वे मंत्रिमंडल के गठन से संतुष्ट हैं और सभी मंत्री प्रदेश के विकास में सहयोग करेंगे। उन्होंने दावा किया कि सरकार स्थाई है और पांच साल पूरे करेगी। एक सवाल पर हुड्डा ने कहा कि हजकां बिना शर्त समर्थन दे तो कांग्रेस उसे लेने को तैयार है।



किरण चौधरी व दूसरे कई वरिष्ठ नेताओं को मंत्री नहीं बनाने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि फिलहाल कैबिनेट में चार पद खाली हैं। पार्टी सबके सम्मान के बारे में सोचेगी। उन्होंने कांग्रेस के एक होने व किसी तरह के विवाद से भी इनकार किया।



जातिगत समीकरण : मंत्री और मुख्य संसदीय सचिव बनने वाले नेताओं को जातिगत आधार पर देखें तो इनमें 4 जाट (दो मंत्री, दो सीपीएस), 3 दलित (1 मंत्री, दो सीपीएस), तीन अहीर (दो सीपीएस, एक मंत्री), एक अप्रवासी ब्राrाण मंत्री के अलावा गुर्जर, राजपूत, मेव, रोड व पंजाबी समुदाय को एक-एक पद दिया गया है।



वैश्य समुदाय के दो निर्दलीयों को मंत्री बनाया गया है। कुल पदों में तो कांग्रेस निर्दलीयों की मजबूरी बताकर अपना दामन छुड़ा सकती है लेकिन अपने कोटे के 11 पदों में उसने संतुलन साधने का प्रयास जरूर किया है। कांग्रेस के कोटे से पांच मंत्री और छह सीपीएस बने हैं। इनमें से दो जाट, तीन दलित व तीन यादवों के अलावा पंजाबी, राजपूत व गुर्जर समुदायों को एक-एक पद दिया गया है।



ऐसा पहली बार हुआ : हरियाणा में चुनाव के दौरान कांग्रेस ने अपनी उपलब्धियों को लेकर एक नारा चलाया था.. ‘ऐसा पहली बार हुआ है।’ शनिवार को यह नारा अलग मायने के साथ सामने आया। हरियाणा में ऐसा पहली बार हुआ है जब नौ विधायकों को मुख्य संसदीय सचिव (सीपीएस) बनाया गया। 1987 तक एक मुख्य संसदीय सचिव बनाया जाता था जो मुख्यमंत्री के साथ काम देखता था। 87 में देवीलाल ने पहली बार पांच संसदीय बनाकर नई परंपरा चलाई। इस बार तो नौ मुख्य संसदीय सचिव बनाकर हुड्डा ने सबको हैरत में डाल दिया।



तीन महिलाओं को मिला सम्मान : हरियाणा में इस बार 9 महिलाएं चुनकर आई हैं। इनमें से सात कांग्रेस और एक-एक इनेलो व भाजपा से है। इनमें से कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल को कैबिनेट मंत्री और अनिता यादव व शारदा राठौर को मुख्य संसदीय सचिव बनाया गया है।



४८ विधायकों में २क् को कार : कांग्रेस के 40 और पार्टी को समर्थन दे रहे 8 अन्य विधायकों में से 20 को झंडी वाली कार मिल चुकी है। अभी एक डिप्टी स्पीकर और मंत्रियों के चार पद खाली हैं। ऐसे में कुल 48 में से 25 विधायकों को तो कुर्सी मिल ही जाएगी।

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