‘उनसे जाना-माना इंदौर को’
इंदौर. मालवा और इंदौर को हमने प्रभाषजी की वजह से ही जाना, माना और चखा। अपने सहयोगियों को छूट और बिना कोशिश प्रेरणा देना उनकी खासियत थी। मूर्धन्य पत्रकार स्व. प्रभाष जोशी को याद करते हुए ये विचार व्यक्त किए वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने।
उन्होंने कहा हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में प्रभाष जोशी युग भी लिखा जाएगा। शनिवार शाम इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में पत्रकार, राजनेता, चिंतक, सामाजिक कार्यकर्ता और आमजन जुटे।
किसी ने उन्हें हिंदी पत्रकारिता का शिक्षक कहा तो किसी ने कहा मालवी-निमाड़ी बोली को राष्ट्रीय पहचान उन्होंने दिलाई। अपनी चहेती शख्सियत के प्रति स्नेह को इन लफ्जों में भी बयान किया गया कि उनकी लेखनी सितार या जलतरंग नहीं बल्कि हार्मोनियम व तबले की संगत की तरह थी।
चिंतक-विचारक गोविंदाचार्य ने कहा प्रभाषजी रिश्ते में बड़े भाई की तरह और सार्वजनिक जीवन में गुरुतुल्य थे। मप्र सरकार की ओर से श्रद्धांजलि देते हुए राज्यमंत्री महेंद्र हार्डिया ने उन्हें इंदौर व मालवा को राष्ट्रीय स्तर पर ऊंचाई देने वाला पत्रकार निरूपित किया।
छत्तीसगढ़ सरकार के प्रतिनिधि चित्तरंजन खेतान ने मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह और अपनी ओर से आदरांजलि अर्पित की। पूर्व सांसद कल्याण जैन ने कहा वे कभी किसी से डरते नहीं थे और न ही किसी को डराते थे। विधायक अश्विन जोशी ने कहा प्रभाषजी ने दिल्ली में इस बात को स्थापित किया कि इंदौर विद्वानों की नगरी है।
अशोक कोठारी ने स्मरण किया कि किस तरह स्व. जोशी ने अभ्यास मंडल व्याख्यानमाला के लिए वक्ताओं को आमंत्रित करने में हमेशा मदद की। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील चौधरी ने कहा उनसे बात करना ही किसी उपलब्धि जैसा था। प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल ने कहा प्रभाषजी ने युवा पत्रकारों की एक बड़ी फौज तैयार की।
पत्रकार मनोहर लिंबोदिया, जयदीप कर्णिक, भाजपा की ओर से आलोक दुबे, उमेश शर्मा, कांग्रेस के भंवर शर्मा, देवास के पूर्व महापौर ठा. जयसिंह और जनसंपर्क विभाग के संयुक्त संचालक डॉ. भूपेंद्र गौतम ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि सभा के सूत्रधार थे प्रेस क्लब महासचिव अन्ना दुराई।
..ताकि मिलती रहे प्रेरणा
प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष जीवन साहू ने मांग की कि प्रभाष जोशी की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए इंदौर में उनके नाम पर कोई सड़क, उद्यान या अन्य कोई स्मारक स्थापित किया जाए। महापौर डॉ. उमाशशि शर्मा ने श्रद्धांजलि के दौरान आश्वस्त किया कि प्रेस क्लब जिस तरीके से तय करेगा, प्रभाषजी की याद को स्थायी बनाने के लिए नगर निगम तैयार है।
अंतिम विदाई
शनिवार सुबह उनके मोती तबेला स्थित पैतृक निवास से शवयात्रा बड़वाह के लिए रवाना हुई। इसके पहले शहर के गणमान्य लोगों, परिजन व इष्ट मित्रों ने उनके निवास पर पुष्पांजलि दी। शवयात्रा के मोती तबेला से रवाना होने के पहले ही पूर्व राष्ट्रपति भैंरोसिंह शेखावत भी वहां पहुंच गए थे।
बड़वाह में राजकमल प्रकाशन के अशोक माहेश्वरी, समाजसेवी कैलाश पंत व अनिल त्रिवेदी और साहित्यकार सरोज कुमार व विलास गुप्ते समेत कई लोगों ने उनकी पार्थिव देह पर पुष्पमालाएं अर्पित की। आंध्रप्रदेश के राज्यपाल नारायणदत्त तिवारी की ओर से प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता के.के. मिश्रा ने पुष्पचक्र अर्पित किया।
भाभी, हमारा दोस्त बिना बताए चला गया : शेखावत
अपने अभिन्न मित्र को श्रद्धासुमन अर्पित करने शनिवार सुबह इंदौर आए पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत का सामना जब स्वर्गीय प्रभाष जोशी की बिलखती पत्नी से हुआ तो उनकी आंखों में भी आंसू आ गए। श्री शेखावत ने उनसे कहा भाभी, हमारा दोस्त तो बिना बताए ही चला गया।
कोई प्रतिनिधि नहीं दिखा
मोती तबेला स्थित निवास से लेकर बड़वाह के खेड़ीघाट तक की प्रभाषजी की अंतिम यात्रा में मध्यप्रदेश सरकार का कोई नुमाइंदा नजर नहीं आया। उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करने वालों के बीच यह चर्चा का मुद्दा भी रहा। इधर, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने इसके लिए विशेष तौर पर अपना प्रतिनिधि रायपुर से इंदौर भेजा।
मां ने दी बेटे को विदाई
उम्र का शतक लगाने के द्वार पर खड़ी प्रभाषजी की माता लीलादेवी जोशी ने जब बेटे की देह पर पुष्प अर्पित किए तो वहां मौजूद उनके रिश्तेदार व मित्र बिलख पड़े। दो दिन पहले ही जब मां भोजन कर रही थी, तब प्रभाषजी ने उनसे फोन पर बात करने की इच्छा जताई थी।
दादा को परेशान मत करो
श्री जोशी के अनुज सुभाष को परिजन ने बमुश्किल संभाला। अंतिम यात्रा में विलंब के चलते वे बार-बार यह कहते हुए बिलख रहे थे कि जल्दी चलो, दादा को इतना परेशान क्यों कर रहे हो।










