चीन से खतरा, तैयारी रखें
इंदौर. चीन को लेकर टेंशन है। इसका प्रमुख कारण दोनों देशों की आपसी प्रतियोगिता है। चीन से किसी भी तरह के संघर्ष के लिए हमें तैयार रहना होगा। खासकर देश को एक तात्कालिक रिएक्शन फोर्स की जरूरत है। यह कहना है देश के पूर्व थलसेना अध्यक्ष वी.पी. मलिक का। वे शनिवार को संवाददाताओं से चर्चा कर रहे थे।
श्री मलिक ने कहा पिछले दो-तीन साल से चीन का रुख भारत के प्रति बदला है। दोनों ही देश आर्थिक और न्यूक्लियर दृष्टि से मजबूत हैं। वह चाहता है कि तवांग उसे मिले पर जानता है कि भारत यह कभी नहीं चाहेगा। अमेरिका के साथ हमारे बढ़ते संबंध भी एक प्रमुख कारण है।
उन्होंने कहा हमारे पास भी संसाधन अच्छे हैं, बजट भी काफी है। जरूरत है तो देश की सीमाओं को आधारभूत सुविधाओं से सम्पन्न बनाने की। श्री मलिक ने कहा हमें युद्ध के लिए तैयार रहने की मानसिकता भी बनाना होगी।
आंतरिक सुरक्षा के लिए कम हो सेना का उपयोग
श्री मलिक ने कहा देश में आंतरिक सुरक्षा के लिए सेना का उपयोग कम से कम हो। साथ ही पुलिस और अन्य बलों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
अब बहुत हो गया
श्री मलिक ने स्वीकारा जब मुंबई में आतंकवादी घटना हुई तो लगा कि अब बहुत हो गया, सीधे संघर्ष का समय आ गया है। उन्होंने कहा पहली बार 1962 में इंदौर आया था। तभी से मेरा यहां से विशेष लगाव रहा है।
यह भी कहा पूर्व थलसेनाध्यक्ष ने
- पाक को अमेरिका पर कम चीन पर ज्यादा भरोसा है।
- अमेरिका हो या अन्य देश वह वही राय देगा जो उसके लिए हितकर हो। क्या मानें और क्या नहीं यह हमे तय करना है।
- बांग्लादेश, चीन, पाक, म्यांमार, भूटान, श्रीलंका सभी देश भारत की सीमा पर हैं सभी ओर फौज नहीं लगाई जा सकती। कुछ बिंदुओं पर हमे उन देशों की सरकारों से भी सौहाद्र्र रखना होगा।
- सेना के लिए बजट की नहीं सिस्टम में बदलाव की जरूरत है।
- एक दल या बहुमत की सरकार का फर्क अन्य क्षेत्रों की तरह सेना पर भी पड़ता है।
जनआंदोलन बने विकास -मोदी
ट्रांसफरिंग आइडिया टू आइकॉन थीम पर शनिवार से इंदौर मैनेजमेंट एसोसिएशन की दो दिनी कॉन्क्लेव शुरू हुई। स्वाइन फ्लू के कारण गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी यहां आ तो नहीं पाए लेकिन करीब डेढ़ घंटे तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पूरे उद्घाटन सत्र में बने रहे और सबके आकर्षण का केंद्र रहे। उन्होंने कहा जिस तरह स्वराज्य के लिए बापू ने आजादी की लड़ाई को जनआंदोलन बनाया था उसी तरह सुराज को जनआंदोलन बनाना होगा।
कार्यक्रम में उद्योगपति रतन टाटा एवं डॉ. सैम पित्रोदा को आईएमए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया गया। श्री टाटा की ओर से टाटा मोटर्स के नान एक्जीक्यूटिव चेयरमैन रविकांत ने अवॉर्ड ग्रहण किया। दिनभर चले सेशन में मैनेजमेंट गुरु गुरुचरण दास एवं एड गुरु पीयूष पांडे ने भी लीडरशिप ट्रांसफार्मिग आइडिया टू आइकॉन पर अपने विचार साझा किए। आईएमए चेयरमैन रविमोहन, प्रेसीडेंट महेश शर्मा, कॉन्क्लेव चेयरमैन जगदीश वर्मा सहित बड़ी संख्या में कॉपरेरेट, मैनेजमेंट प्रोफेशनल एवं स्टूडेंट्स मौजूद थे।
इंदौर में बनेगी ई-लाइब्रेरी
कार्यक्रम में आईएमए की ओर से डॉ. सैम पित्रोदा ने इंदौर में मैनेजमेंट प्रोफेशनल, कॉपरेरेट एवं स्टूडेंट्स के लिए ई-लाइब्रेरी स्थापित करने की घोषणा की।
इंदौर में आईटी टैलेंट पूल तैयार करें -पित्रौदा
इंदौर को यदि आईटी हब बनाना है तो इसके लिए यहीं पर टैलेंट पूल तैयार करना पड़ेगा। भले ही शहर में आईआईटी और आईआईएम जैसी दो संस्थाएं एक साथ मौजूद हों लेकिन आईटी क्षेत्र को विकसित करने के लिए आईटी ट्रेनिंग इंस्ट्टियूट की जरूरत है।
इस नसीहत के साथ भारत में सूचना क्रांति के जनक माने जाने वाले और नॉलेज कमीशन के चेयरमैन सैम पित्रोदा ने हिदायत दी कि मध्यप्रदेश सरकार को नॉलेज कमीशन की रिपोर्ट को गंभीरता से लेना होगा और उसका अध्ययन कर रिपोर्ट पर अमल करना होगा। शनिवार को श्री पित्रोदा ने नॉलेज कमीशन की रिपोर्ट में दिए गए निर्देशों का उल्लेख किया।
- युनिर्वसिटी को सबसे पहले संबंधता प्राप्त कॉलेजों को अपने से अलग कर देना चाहिए ताकि सही ढंग से रिसर्च हो सके।
- वोकेशनल एजुकेशन पर जोर देने के साथ ही प्रदेश में और ज्यादा मेडिकल, नर्सिग, एग्रीकल्चर आदि विषयों के कॉलेज खोलने की जरूरत है।
- देशभर के पांच हजार एजुकेशन सेंटर को जोड़ने वाला नेटवर्क तैयार किया जा रहा है जिससे चेन्नई के प्रोफेसर इंदौर के बच्चों को भी पढ़ा सके।
संचार की बातें
- भारत ने टेलिकॉम के क्षेत्र में अच्छा काम किया लेकिन आईटी और हार्डवेयर के उत्पादों को विकसित करने में हम चीन से पिछड़ गए हैं।
- टेलिकॉम सेक्टर में 74 प्रतिशत विदेशी निवेश नहीं होना चाहिए।
- पंचायती राज को विकसित करने के लिए ब्रांडबैंड कनेक्शन को गांव-गांव तक पहुंचाना होगा।
शासन पर मंथन
- लाल फीते में बंधी फाइलों को कम्पयूटराइज्ड करने की जरूरत है क्योंकि आज भी दिल्ली की प्राइम लोकेशन पर मौजूद संचार भवन के दो मंजिलों में फाइलें भरी पड़ी हैं।
- एक और उदारीकरण की जरूरत है।










